यूपी में DGP की कुर्सी पर अटका फैसला, UPSC ने लौटाया प्रस्ताव; आयोग ने उठाए बड़े सवाल

उत्तर प्रदेश में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति पर UPSC ने सवाल उठाते हुए प्रस्ताव वापस कर दिया है। अब सरकार को नए सिरे से प्रक्रिया पूरी करनी होगी, जिससे नियुक्ति में और देरी तय मानी जा रही है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 20 March 2026, 1:59 PM IST

Lucknow: उत्तर प्रदेश की सबसे ताकतवर पुलिस कुर्सी इन दिनों किसी क्राइम थ्रिलर की कहानी जैसी उलझनों में फंसी हुई है। फाइलें घूम रही हैं, सवाल उठ रहे हैं और फैसले टलते जा रहे हैं। मामला है स्थायी डीजीपी की नियुक्ति का, जहां सब कुछ तय होता दिख रहा था, लेकिन आखिरी वक्त पर ऐसा मोड़ आया कि पूरी प्रक्रिया पर ब्रेक लग गया। सूत्रों के मुताबिक, सरकार की तरफ से भेजे गए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का प्रस्ताव संघ लोक सेवा आयोग यानी Union Public Service Commission ने वापस कर दिया है। इसके साथ ही आयोग ने ऐसे सवाल उठाए हैं, जिनसे अब यह साफ हो गया है कि यूपी में स्थायी डीजीपी की तैनाती में अभी और इंतजार करना पड़ेगा।

UPSC की आपत्तियों ने रोकी प्रक्रिया

मामला तब पेचीदा हुआ जब Union Public Service Commission ने सरकार से पूछा कि जून 2025 में जब कार्यवाहक डीजीपी की नियुक्ति की गई थी, तब वरिष्ठ अधिकारियों की सेवा अवधि कितनी बची थी। आयोग ने यह भी साफ किया है कि जो प्रस्ताव भेजा गया था, वह 2025 की नई गाइडलाइन और कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप नहीं है। अब सरकार को इन सभी सवालों के जवाब देने होंगे और फिर नए सिरे से प्रस्ताव तैयार करना होगा। माना जा रहा है कि इसमें कम से कम तीन महीने का समय लग सकता है, यानी तब तक यूपी को स्थायी डीजीपी मिलने की संभावना बेहद कम है।

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सुप्रीम कोर्ट के नियम बने अड़चन

इस पूरे मामले की जड़ में Supreme Court of India के वो निर्देश हैं, जिनमें सभी राज्यों को स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए UPSC को पैनल भेजना अनिवार्य किया गया है। यही कारण है कि यूपी सरकार ने भी नियमों के मुताबिक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजा था। लेकिन अब आयोग ने उसी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खास तौर पर यह देखा जा रहा है कि क्या कार्यवाहक डीजीपी बनाते समय सभी नियमों का पालन हुआ था या नहीं।

जून 2025 से चल रहा है अस्थायी दौर

जून 2025 में Rajeev Krishna को उत्तर प्रदेश का कार्यवाहक डीजीपी बनाया गया था। उस वक्त यह एक अस्थायी व्यवस्था मानी जा रही थी, लेकिन अब यह स्थिति लंबी खिंचती नजर आ रही है। UPSC ने खास तौर पर यह पूछा है कि उस समय उनसे सीनियर अधिकारियों की सेवा अवधि कितनी बाकी थी। यही सवाल अब पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को उलझा रहा है।

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सीनियरिटी लिस्ट में कौन आगे?

अगर मौजूदा सीनियरिटी लिस्ट पर नजर डालें तो 1990 बैच की आईपीएस Renuka Mishra सबसे ऊपर हैं, जो फिलहाल डीजीपी ऑफिस से अटैच हैं। उनके बाद 1991 बैच के Alok Sharma का नाम आता है, जो इस समय केंद्र में एसपीजी के डीजी के पद पर तैनात हैं और जून 2026 में रिटायर होने वाले हैं। तीसरे नंबर पर Piyush Anand हैं, जो फिलहाल एनडीआरएफ के डीजी के रूप में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर हैं। चौथे स्थान पर मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी Rajeev Krishna हैं, जबकि पांचवें नंबर पर डीजी जेल PC Meena का नाम आता है।

नियमों में फंसे दावेदार

स्थायी डीजीपी बनने के लिए एक अहम नियम है। अधिकारी के पास कम से कम छह महीने की सेवा शेष होनी चाहिए। इसी नियम के चलते Alok Sharma इस दौड़ से बाहर माने जा रहे हैं, क्योंकि उनका रिटायरमेंट जून 2026 में है।

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  • Lukcnow

Published : 
  • 20 March 2026, 1:59 PM IST