Budaun: ‘कोर्स’ के नाम पर खुली लूट ! क्या आपके बच्चे की पढ़ाई भी बन रही कमाई का जरिया?

बदायूं में स्कूलों से जुड़ी एक ऐसी सच्चाई सामने आई है, जिसे जानकर हर अभिभावक चौंक सकता है। “कोर्स” के नाम पर क्या वाकई सब कुछ जरूरी है या इसके पीछे कुछ और कहानी छिपी है? कई इलाकों से उठती आवाजें अब बड़ा सवाल बन चुकी हैं।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 9 April 2026, 3:33 PM IST

Budaun: नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही बदायूं में प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फिर सामने आई है। “कोर्स” के नाम पर किताब-कॉपी, यूनिफॉर्म और अन्य जरूरी सामान के लिए अभिभावकों से भारी रकम वसूलने के आरोप लगे हैं। हर साल की तरह इस बार भी पुराना ‘पैटर्न’ दोहराया जा रहा है, जिससे अभिभावकों की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है।

इन इलाकों से आ रहीं शिकायतें

जिले के सिविल लाइंस, उझानी, बिल्सी, दातागंज और सहसवान जैसे कई इलाकों से एक जैसी शिकायतें मिल रही हैं। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधन पहले से तय दुकानों की सूची थमा देता है और वहीं से सामान खरीदने का दबाव बनाता है। अगर कोई अभिभावक बाहर से सस्ता सामान लेने की कोशिश करता है, तो उसे तरह-तरह की चेतावनियां दी जाती हैं, जैसे एडमिशन रोकना, रिजल्ट में देरी या बच्चे के साथ भेदभाव।

कहां से आ रही सबसे बड़ी समस्या?

सबसे बड़ी समस्या बुकलिस्ट को लेकर सामने आ रही है। आरोप है कि स्कूल ऐसी किताबों की सूची देते हैं जिनमें खास प्रकाशक और एडिशन तय होते हैं, जो आम बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं होते। नतीजा, अभिभावकों को मजबूरन उन्हीं दुकानों से महंगे दामों पर खरीदारी करनी पड़ती है। कई मामलों में यह कीमत बाजार दर से 20 से 40 प्रतिशत तक अधिक बताई जा रही है।

यूनिफॉर्म के मामले में भी स्थिति अलग नहीं है। स्कूल की लोगो लगी ड्रेस, टाई, बेल्ट, जूते और मोजे तक एक ही दुकान से खरीदना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा ‘एक्टिविटी किट’, ‘डिजिटल कंटेंट फीस’ और ‘मेंटेनेंस चार्ज’ जैसे अतिरिक्त खर्च भी जोड़ दिए जाते हैं, जिनका स्पष्ट विवरण अभिभावकों को नहीं दिया जाता।

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कोर्स के बढ़ा दिए गए रेट

एक अभिभावक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले साल जो कोर्स 5 हजार रुपये के आसपास मिला था, वही इस बार करीब 8 हजार रुपये तक पहुंच गया है। सवाल करने पर स्कूल की ओर से यही जवाब मिलता है कि यह अनिवार्य कोर्स है और इसे लेना ही होगा।

शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार, कोई भी स्कूल अभिभावकों को किसी एक दुकान से खरीदारी करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। साथ ही फीस और अन्य खर्चों में पारदर्शिता रखना भी अनिवार्य है। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर इन नियमों का पालन होता नजर नहीं आ रहा है।

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बच्चों का भविष्य दिखाकर पैदा करते हैं डर

अभिभावकों का आरोप है कि शिकायत करने पर उन्हें बच्चे के भविष्य का डर दिखाकर चुप करा दिया जाता है। पिछले वर्षों में भी इस मुद्दे पर कई बार अधिकारियों को शिकायतें दी गईं, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने से यह समस्या हर साल दोहराई जाती है।

अब अभिभावकों ने प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि सभी स्कूलों की बुकलिस्ट और कीमतें सार्वजनिक की जाएं, तय दुकानों की बाध्यता खत्म हो और अधिक वसूली करने वाले स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

Location :  Budaun

Published :  9 April 2026, 3:33 PM IST