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BHU के DNA रिसर्च में रामसेतु को लेकर चौंकाने वाला दावा (Img: Google)
Varanasi: वाराणसी स्थित बीएचयू (बनारस हिंदू विश्वविद्यालय) के वैज्ञानिकों ने मानव सभ्यता और रामसेतु को लेकर एक बड़ा दावा किया है। माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए पर आधारित इस अंतरराष्ट्रीय शोध के मुताबिक, करीब 57 हजार साल पहले अफ्रीका से निकले आधुनिक मानव दक्षिण एशिया होते हुए श्रीलंका पहुंचे थे। उस समय समुद्र का जलस्तर आज की तुलना में काफी कम था और भारत-श्रीलंका के बीच रामसेतु जैसा जमीनी संपर्क मौजूद था।
यह शोध बीएचयू, श्रीलंका के कोलंबो विश्वविद्यालय समेत दुनिया के पांच संस्थानों के 16 वैज्ञानिकों ने मिलकर किया। शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल PLOS One में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन में श्रीलंका के सिंहली, श्रीलंकाई तमिल और वेद्दा समुदायों के आनुवंशिक इतिहास का विश्लेषण किया गया।
शोध की प्रमुख लेखिका डॉ. अंजना वेलिकला के अनुसार, अध्ययन में 139 नए जीनोम की सीक्वेंसिंग की गई। इसके लिए माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए का उपयोग किया गया, जो केवल मां से बच्चों में स्थानांतरित होता है।
बीएचयू के जीन वैज्ञानिक प्रो. ज्ञानेश्वर चौबे ने बताया कि लंबे समय से वैज्ञानिक इस बात पर बहस कर रहे थे कि अफ्रीका से निकले मानव ऑस्ट्रेलिया और ओशिनिया तक कैसे पहुंचे। इस शोध से “कोस्टल रूट” यानी समुद्री तट के रास्ते मानव प्रवास की पुष्टि होती है।
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शोधकर्ताओं ने श्रीलंका में मानव बसावट को चार चरणों में बांटा है। पहला चरण 57 हजार साल पहले का माना गया है, जब आधुनिक मानव दक्षिण एशिया पहुंचे। इसके बाद हिमयुग के बाद पश्चिम यूरेशियाई जीन का प्रभाव बढ़ा। करीब 7 हजार साल पहले खेती और व्यापार के कारण भारत-श्रीलंका के बीच संपर्क बढ़ा, जबकि आधुनिक युग में विदेशी आक्रमण और व्यापारिक गतिविधियों ने नए जेनेटिक मिश्रण पैदा किए।
Location : Varanasi
Published : 28 May 2026, 1:24 PM IST
Topics : BHUResearch DNAStudy HumanMigration RamSetu VaranasiNews