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नोएडा के सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में अफसरों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। प्राधिकरण ने 60 पन्नों की रिपोर्ट और डिजास्टर डिटेल्स एसआईटी को सौंप दी हैं। जांच में दो घंटे तक रेस्क्यू न होने और सुरक्षा इंतजामों की भारी लापरवाही पर सवाल उठे हैं। एसआईटी 24 जनवरी को रिपोर्ट सौंपेगी।
इंजीनियर युवराज मेहता
Noida: सेक्टर-150 में इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में अब प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। गुरुवार को नोएडा प्राधिकरण ने इस हादसे की जांच कर रही एसआईटी को सात अहम बिंदुओं पर जवाब सौंप दिया है। यह रिपोर्ट 60 पन्नों से ज्यादा की है। साथ ही डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़ी रिपोर्ट भी एसआईटी को दे दी गई है। अब एसआईटी इन दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है और 24 जनवरी को अपनी अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने की तैयारी में है। रिपोर्ट के बाद बड़े प्रशासनिक बदलाव और कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
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प्राधिकरण ने एसआईटी को बताया है कि युवराज मेहता की कार जिस इलाके में डूबी, वहां स्पोर्ट्स सिटी के 21 प्लॉटों का आवंटन, ओसी और सीसी जारी करने की तारीखें और उनकी शर्तें क्या थीं। इसके साथ ही सड़क निर्माण, सड़क सुरक्षा के इंतजाम, पानी और सीवर जैसी सुविधाएं कब दी गईं। प्लॉटों का पजेशन कब सौंपा गया। इसकी पूरी जानकारी भी दी गई है। घटना से पहले एक ट्रक के दुर्घटनाग्रस्त होने पर क्या कार्रवाई हुई और युवराज हादसे के बाद तुरंत क्या कदम उठाए गए। इन सभी बिंदुओं पर जवाब मांगा गया था।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने अपनी शुरुआती फैक्ट फाइंडिंग का मौखिक ब्योरा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दे दिया है। संकेत साफ हैं कि अगले 48 घंटों में दोषी अफसरों और कर्मचारियों पर कार्रवाई शुरू हो सकती है। यही वजह है कि प्राधिकरण और संबंधित विभागों में अफसरों की बेचैनी साफ नजर आ रही है।
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एसआईटी इस बात की गहन जांच कर रही है कि युवराज की गाड़ी डूबने के बाद करीब दो घंटे तक बचाव कार्य क्यों शुरू नहीं हो सका। कंट्रोल रूम, फील्ड स्टाफ और संबंधित विभागों के बीच तालमेल कितना कमजोर था। इसका पूरा रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। यह भी जांच का हिस्सा है कि जलभराव वाले इलाके पहले से चिन्हित थे या नहीं और अगर थे तो समय पर चेतावनी और बैरिकेडिंग क्यों नहीं की गई।
फिलहाल, प्राधिकरण ने सेक्टर में सड़क के दोनों किनारों पर सीमेंट ब्लॉकों से बैरिकेडिंग लगाने और पूरे नोएडा में जलभराव वाले गड्ढों का पानी निकालने के निर्देश जारी कर दिए हैं। सवाल अब भी कायम है कि अगर ये इंतजाम पहले होते तो क्या युवराज की जान बच सकती थी?