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इलाहाबाद हाईकोर्ट (Image Source: Pinterest)
Prayagraj: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) की भर्ती परीक्षा एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला सीधे इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र में बड़ी संख्या में गलत प्रश्न पाए जाने पर अदालत ने आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जब 125 में से 35 प्रश्न गलत पाए जा रहे हैं तो यह सिर्फ एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल है। अदालत ने आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होकर जवाब देने का निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भर्ती परीक्षा जैसे संवेदनशील मामलों में इतनी बड़ी संख्या में त्रुटिपूर्ण प्रश्न स्वीकार्य नहीं हैं। अदालत ने आयोग से पूछा कि आखिर प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया क्या है और विशेषज्ञों की जांच के बावजूद इतने सवाल गलत कैसे हो गए।
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ ने रिट-ए संख्या 9799/2026, आदित्य कुमार सिंह एवं 17 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य की सुनवाई के दौरान पारित किया। याचिकाकर्ताओं ने भर्ती परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों की गुणवत्ता और उनकी वैधता पर सवाल उठाए थे।
सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि पहले 29 प्रश्न सिलेबस से बाहर पाए गए थे। इसके बाद विशेषज्ञों की समीक्षा में चार और प्रश्न गलत पाए गए। आयोग के अनुसार कुल 33 प्रश्न त्रुटिपूर्ण मिले। आयोग ने बताया कि इन प्रश्नों के अंक अन्य सही प्रश्नों में वितरित कर नई संशोधित चयन सूची जारी की गई, जिसमें 42 नए अभ्यर्थियों को शामिल किया गया है।
हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि किसी परीक्षा में 25 प्रतिशत से अधिक प्रश्न गलत पाए जाते हैं तो यह केवल परिणाम संशोधित करने का मामला नहीं रह जाता। अदालत ने कहा कि इससे प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया, विशेषज्ञों के चयन और परीक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। ऐसी स्थिति में आयोग को पूरी प्रक्रिया स्पष्ट करनी होगी।
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हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव और परीक्षा नियंत्रक को 5 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। दोनों अधिकारियों को शपथपत्र दाखिल कर यह बताना होगा कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया क्या है, विशेषज्ञों का चयन किस आधार पर किया जाता है और भविष्य में ऐसी गंभीर त्रुटियों को रोकने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी।
अदालत ने साफ किया है कि आयोग का पूरा स्पष्टीकरण शपथपत्र के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। इसके बाद न्यायालय इस बात पर विचार करेगा कि आयोग की प्रक्रिया में सुधार के लिए आगे क्या निर्देश दिए जाएं।
Location : Prayagraj
Published : 4 August 2026, 7:38 PM IST