EPFO New Rule 2027: अब 25 हजार तक के वेतन वाले कर्मचारी होंगे ईपीएस के हकदार, सरकार जल्द बदलेगी नियम, जानें पूरी डिटेल्स

ईपीएफओ (EPFO) के नियमों में जल्द ही बड़ा बदलाव होने जा रहा है। वित्त मंत्रालय ने ईपीएस के तहत पेंशन गणना की अनिवार्य सीमा 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कैबिनेट की अंतिम मुहर के बाद यह नया नियम लागू हो सकता है।

Updated : 6 August 2026, 1:02 PM IST
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New Delhi: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के दायरे को और अधिक व्यापक बनाने की तैयारी चल रही है। इसके तहत वित्त मंत्रालय ने ईपीएफ और ईपीएस के अंतर्गत आने वाली अनिवार्य पेंशन गणना की सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने के प्रस्ताव पर अपनी मुहर लगा दी है। इस बदलाव से उन तमाम नौकरीपेशा लोगों को सीधा लाभ मिलेगा जिनकी मासिक सैलरी 25,000 रुपये तक है। इसके साथ ही सरकार स्टार्टअप कंपनियों को इस योजना के दायरे में लाने और पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने पर भी काम कर रही है।

कब से लागू हो सकता है नया नियम?

यदि इस प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट की तरफ से अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो सरकार इसे आगामी 1 अप्रैल 2027 से लागू कर सकती है। इस नियम के लागू होने के बाद, जिन कर्मचारियों का वेतन 15,001 रुपये से 25,000 रुपये के बीच है, उनकी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (डीए) से अंशदान कटने लगेगा और उन्हें पेंशन का अधिकार मिल जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि कैबिनेट की मंजूरी के बाद कर्मचारियों के रिटायरमेंट फंड में बड़ा उछाल आ सकता है।

न्यूनतम पेंशन और एनएसी की मांगें

गौरतलब है कि साल 2014 से सरकार ने न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये महीना तय की थी, जो मौजूदा नियमों के तहत अभी भी उतनी ही है। हालांकि, राष्ट्रीय संघर्ष समिति (एनएसी) और देश भर के तमाम पेंशनभोगी संगठन लगातार यह मांग उठा रहे हैं कि न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 7,500 रुपये प्रति माह किया जाए और इसे महंगाई भत्ते से जोड़ा जाए। हालांकि, संसद में सरकार की ओर से इस विशेष वृद्धि पर अभी तक कोई अंतिम आधिकारिक मंजूरी नहीं दी गई है।

पेंशन की गणना का फॉर्मूला और मौजूदा सीमा

कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद कितनी पेंशन मिलेगी, यह उसकी कुल नौकरी की अवधि, मूल वेतन और महंगाई भत्ते पर निर्भर करती है। ईपीएफओ के तय फॉर्मूले के अनुसार, इसकी गणना (सेवा अवधि $\times$ (60 $\times$ मूल वेतन + महंगाई भत्ता)) / 70 के आधार पर की जाती है। मौजूदा नियमों के अनुसार, पेंशन की गणना के लिए अधिकतम वेतन सीमा 15,000 रुपये तय है। इसका मतलब है कि अगर किसी कर्मचारी का मूल वेतन और डीए 50,000 रुपये भी है, तब भी गणना के लिए केवल 15,000 रुपये ही माने जाएंगे, जब तक कि कर्मचारी ने उच्च पेंशन का विकल्प न चुना हो।

कंपनियों के लिए पंजीकरण और पात्रता के नियम

कानून के प्रावधानों के मुताबिक, जिन कंपनियों या स्टार्टअप्स में 20 या उससे अधिक कर्मचारी काम करते हैं, उनके लिए ईपीएफओ के पास पंजीकरण कराना अनिवार्य होता है। ऐसे संस्थानों में काम करने वाले कर्मचारियों को पेंशन का लाभ पाने के लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं। कर्मचारियों को ईपीएफओ के तहत कम से कम 10 साल की अंशदायी सेवा पूरी करनी होती है, जिसके बाद 58 वर्ष की आयु होने पर वे नियमित मासिक पेंशन के हकदार बन जाते हैं।

 

Location :  New Delhi

Published :  6 August 2026, 1:02 PM IST

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