हिंदी
कीबोर्ड का मौजूदा लेआउट करीब 150 साल पुराने टाइपराइटर से जुड़ा हुआ है। शुरुआती टाइपराइटर में अगर अक्षर पास-पास होते, तो टाइप करते समय धातु की छड़ें आपस में टकरा जाती थीं। इससे मशीन जाम हो जाती थी और काम बार-बार रुक जाता था।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)
कीबोर्ड का मौजूदा लेआउट करीब 150 साल पुराने टाइपराइटर से जुड़ा हुआ है। शुरुआती टाइपराइटर में अगर अक्षर पास-पास होते, तो टाइप करते समय धातु की छड़ें आपस में टकरा जाती थीं। इससे मशीन जाम हो जाती थी और काम बार-बार रुक जाता था।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)