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एलपीजी सिलिंडर की कमी के बीच इंडक्शन चूल्हों की मांग तेजी से बढ़ गई है और कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर यह आउट ऑफ स्टॉक हो गए हैं। हालांकि इंडक्शन चूल्हा खरीदते समय पावर रेटिंग, साइज, टेंपरेचर कंट्रोल, सेफ्टी फीचर्स और ब्रांड जैसे पहलुओं पर ध्यान देना बेहद जरूरी है, वरना बिजली का बिल और खर्च दोनों बढ़ सकते हैं।
इंडक्शन चूल्हों की लूट (Source: Internet)
New Delhi: देश में एलपीजी सिलिंडर की किल्लत ने लोगों की रसोई का समीकरण ही बदल दिया है। गैस की सप्लाई में देरी और कालाबाजारी के बीच अब लोग तेजी से बिजली से चलने वाले इंडक्शन चूल्हों की ओर रुख कर रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि कई क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर इंडक्शन चूल्हे अचानक आउट ऑफ स्टॉक हो गए। लेकिन इस अफरा-तफरी में जल्दबाजी में खरीदा गया एक गलत इंडक्शन चूल्हा आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है।
अगर बिना सोचे-समझे कोई भी मॉडल खरीद लिया, तो हर महीने बिजली का बिल इतना बढ़ सकता है कि राहत की जगह नई परेशानी खड़ी हो जाए।
इन दिनों देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलिंडर की सप्लाई को लेकर परेशानियां सामने आ रही हैं। कहीं सिलिंडर देर से मिल रहा है तो कहीं लोगों को ज्यादा कीमत देकर गैस खरीदनी पड़ रही है। ऐसे में कई परिवारों ने अस्थायी समाधान के तौर पर इंडक्शन चूल्हे का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। इसी वजह से बाजार में इसकी मांग तेजी से बढ़ गई है।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से लेकर इलेक्ट्रॉनिक स्टोर्स तक इंडक्शन चूल्हों की बिक्री अचानक बढ़ी है। कुछ क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर तो स्थिति यह रही कि लोकप्रिय मॉडल कुछ ही समय में आउट ऑफ स्टॉक हो गए।
इंडक्शन चूल्हा खरीदते समय सबसे पहली चीज जिस पर ध्यान देना चाहिए, वह है उसकी पावर रेटिंग। लेकिन अक्सर लोग इसी पहलू को नजरअंदाज कर देते हैं। बाजार में ज्यादातर इंडक्शन चूल्हे 1200 वॉट से लेकर 2000 वॉट तक की पावर रेंज में आते हैं। कम वॉटेज वाले चूल्हे बिजली कम खपत करते हैं, लेकिन उनमें खाना पकाने में ज्यादा समय लग सकता है। दूसरी तरफ ज्यादा वॉटेज वाले इंडक्शन चूल्हे तेजी से कुकिंग करते हैं, लेकिन उनकी बिजली खपत भी ज्यादा होती है।
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इंडक्शन चूल्हा खरीदते समय एक और महत्वपूर्ण बात है उसका साइज। कई लोग बिना किचन का स्पेस देखे ही चूल्हा खरीद लेते हैं और बाद में उसे रखने में दिक्कत होती है। बाजार में ज्यादातर इंडक्शन चूल्हे सिंगल बर्नर फॉर्मेट में आते हैं, जो छोटे किचन के लिए उपयुक्त होते हैं। हालांकि कुछ बड़े मॉडल भी उपलब्ध हैं। अगर किचन काउंटर पर जगह कम है, तो कॉम्पैक्ट साइज का मॉडल लेना ज्यादा बेहतर रहेगा। इससे इस्तेमाल करना आसान रहेगा और किचन में भीड़भाड़ नहीं होगी।
इंडक्शन चूल्हा खरीदते समय उसके कंट्रोल सिस्टम पर भी ध्यान देना चाहिए। अच्छे मॉडल में मल्टीपल पावर लेवल और टेंपरेचर कंट्रोल के विकल्प मिलते हैं। इन फीचर्स की मदद से आप अलग-अलग तरह के काम आसानी से कर सकते हैं, जैसे पानी उबालना, दूध गर्म करना, सब्जी पकाना या तड़का लगाना। अगर चूल्हे में टेंपरेचर कंट्रोल सीमित होगा, तो खाना बनाने में परेशानी हो सकती है। इसलिए ऐसा मॉडल चुनना बेहतर है जिसमें कुकिंग के कई मोड उपलब्ध हों।
इंडक्शन चूल्हा भले ही गैस की तुलना में सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इसमें भी कुछ जरूरी सेफ्टी फीचर्स होने चाहिए। खरीदते समय यह देखना जरूरी है कि चूल्हे में ऑटोमैटिक शट-ऑफ, ओवरहीटिंग प्रोटेक्शन और चाइल्ड लॉक जैसे फीचर्स मौजूद हों। ये फीचर्स खासकर उन घरों में बेहद जरूरी होते हैं जहां छोटे बच्चे रहते हैं।
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इंडक्शन चूल्हा खरीदते समय सिर्फ कीमत या डिजाइन देखना ही काफी नहीं होता। यह भी जरूरी है कि आप भरोसेमंद ब्रांड का प्रोडक्ट चुनें। अच्छे ब्रांड के इंडक्शन चूल्हे आमतौर पर ज्यादा टिकाऊ होते हैं और उनमें इस्तेमाल होने वाली तकनीक भी बेहतर होती है। इसके अलावा इनका सर्विस नेटवर्क भी मजबूत होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि एलपीजी संकट के कारण इंडक्शन चूल्हों की मांग जरूर बढ़ी है, लेकिन जल्दबाजी में कोई भी मॉडल खरीद लेना सही फैसला नहीं होगा। अगर सही पावर रेटिंग, सही साइज और जरूरी सेफ्टी फीचर्स को ध्यान में रखकर इंडक्शन चूल्हा खरीदा जाए, तो यह गैस के विकल्प के तौर पर काफी उपयोगी साबित हो सकता है। लेकिन अगर बिना सोचे-समझे खरीदा गया, तो बिजली का बिल बढ़ने के साथ-साथ कुकिंग में भी परेशानी हो सकती है।