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नई दिल्ली: आज बसंत पंचमी है। इस दिन को कई कारणों की वजह से शुभ माना जाता है। कई अहम कार्य इसी दिन से शुरु किए जाते हैं। इस दिन को देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है। इस दिन मां सरस्वती की भी पूजा की जाती है व बच्चों की पढ़ाई का आरंभ भी किया जाता है। आन्ध्र प्रदेश में इसे विद्यारंभ पर्व कहते हैं। यहां के बासर सरस्वती मंदिर में विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं।
क्यों की जाती है मां सरस्वती की पूजा?
मां सरस्वती को विद्या और बुद्धि की देवी माना जाता है। पुराणों में वर्णित एक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने देवी सरस्वती से खुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि बसंत पंचमी के दिन तुम्हारी आराधना की जाएगी। इसी मान्यता के अनुसार इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है तथा देश के कई हिस्सों में इस दिन बच्चों को पहला शब्द लिखना और पढ़ना सिखाया जाता है।
खुशी का भी प्रतीक हैं मां सरस्वती
पुराणों में प्रचलित एक कथा के अनुसार भगवान विष्णु की आज्ञा के अनुसार जब ब्रह्मा ने संसार की रचना की तो उन्हें कुछ अधूरा-अधूरा लगा। संसार में उदासी छाई हुई थी। इसीलिए उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार हाथों वाली एक सुंदर स्त्री प्रकट हुई। उस स्त्री के एक हाथ में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वर मुद्रा में था। ब्रह्मा जी ने इस सुंदर देवी से वीणा बजाने को कहा ताकि संसार की उदासी दूर हो। जैसे ही मां सरस्वती ने वीणा बजाई ब्रह्मा जी की बनाई हर चीज में स्वर आ गया। तभी ब्रह्मा जी ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती नाम दिया। यह दिन बसंत पंचमी का था।
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कैसे करें मां सरस्वती की आराधना?
1. सबसे पहले सुबह उठकर नहा लें।
2. उसके बाद मां सरस्वती को पुष्प अर्पित करें।
3. पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें।
4. पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र और किताबें रखें, और बच्चों को पूजा में शामिल करें।
5. इस दिन पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। पूजा करते समय पीले वस्त्र ज़रूर पहनें। अगर पूरे दिन पीले वस्त्र धारण करेंगे तो और बढ़िया रहेगा।
6. पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें।
7. सबसे शुभ काम है इस दिन बच्चों को किताबें उपहार स्वरूप दें।
Published : 10 February 2019, 10:43 AM IST
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