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लखनऊ/गाजियाबाद: आवास एवं विकास परिषद के आयुक्त रणवीर प्रसाद एक्शन ने पांच अफसरों के खिलाफ विजिलेंस जांच की सिफारिश आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के अपर मुख्य सचिव नितिन रमेश गोकर्ण को पत्र लिखकर की है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के मुताबिक वाटर ट्रीटमेंट के लिए आरक्षित जमीन पर गौड़ संस ने मकान बनाकर बेचे डाले। आवास विकास के अफसरों ने इसके लिए नियम-कायदों में जमकर हेराफेरी और मनमानी की।
पिछले साल जुलाई में आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के अपर मुख्य सचिव नितिन रमेश गोकर्ण ने दोषियों को चिन्हित करने का बीड़ा उठाया।
इसी कड़ी में शासन ने पिछले साल जुलाई में ACS नियुक्ति देवेश चतुर्वेदी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी की SIT बनायी। इस कमेटी में मेरठ मंडलायुक्त और ADG मेरठ जोन सदस्य बनाये गये।
जांच कमेटी ने मामले में व्यापक गड़बड़ियां पायी। अब इस मामले में विजिलेंस जांच की सिफारिश के बाद दोषियों के हाथ-पांव फूल गये हैं। यदि विजिलेंस ने ईमानदारी से जांच की तो कई भ्रष्टाचारी जेल की सलाखों के पीछे होंगे।
Published : 14 January 2024, 6:58 PM IST
Topics : आवास एवं विकास परिषद उत्तर प्रदेश गाजियाबाद जमीन घोटाला लखनऊ विजिलेंस विभाग सिद्धार्थ विहार योजना
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