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मेरठः अब इसे राज्य सरकार की अनदेखी कहिये या फिर जानबूझकर की गई लापरवाही कि देश के लिये अपने प्राणों को न्यौछावर करने वाले उत्रर प्रदेश के इस लाल की अंत्येष्टि के लिये न तो कोई राजनेता पहुंचा और नहीं की कोई प्रशासनिक अधिकारी। पंद्रह दिन पहले पंजाब में आतंकी हमले में घायल हुये मेरठ निवासी BSF जवान सनोज कुमार अस्पताल में जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे थे। जंग के मैदान में तो वे जीत गये जबकि जिंदगी से बुधवार की रात जलालाबाद के एक अस्पताल हार गये और उन्होंने दम तोड़ दिया।
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शहीद का पार्थिव शरीर जब उनके पैतृक निवास किठौर में गोविंदपुर-शकरपुर पहुंचा तो यहां उनकी अंत्येष्टि के लिये न तो कोई राजनेता पहुंचा और न ही कोई प्रशासनिक अधिकारी। शहीद को सलामी देने के लिये जब यहां कोई नहीं पहुंचा तो इससे उसके परिजनों और ग्रामीणों में रोष व्याप्त हो गया।जवान की अस्पताल में दम तोड़ने की खबर से पूरे गांव में मातम छा गया। जब उनके शव को गांव में लाया गया तो इस दौरान सिर्फ किठौर के ही ग्रामीण ही नहीं बल्की आस-पास के गावों के भी लोग शहीद के अंतिम संस्कार के लिये यहां पहुंचे।
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जबकि प्रशासन की तरफ से पुलिस अधिकारी तो दूर कोई पुलिसकर्मी भी यहां नहीं पहुंचा। सिर्फ सपा नेता अतुल प्रधान ने शहीद के परिवार से मुलाकात की और उन्हें इस गमगीन पल से उबारने के लिये भगवान से कृपा की। अतुल प्रधान ने शहीद के परिजनों और ग्रामीणों के साथ मिलकर BSF जवान को शहीद का दर्जा देने की मांग की है।
यहीं नहीं ग्रामीणों का राज्य सरकार के प्रति गुस्सा फूट पड़ा है उनका कहना है कि योगी सरकार ने जिस तरह से BSF के जवान का अपमान किया है उससे पता चलता है कि प्रदेश सरकार देश के लिये अपने प्राणों की बाजी लगा देने वाले जांबाजों को लेकर कितनी अलर्ट है।
Published : 23 November 2018, 5:44 PM IST
Topics : BSF जवान अंत्येष्टि आतंकी उत्तर प्रदेश ग्रामीण प्रशासनिक अधिकारी मेरठ राजनेता शहीद सनोज कुमार
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