DN Exclusive: यूपी राज्य संपत्ति विभाग में घूसखोरी चरम पर, भ्रष्ट अधिकारियों के काले कारनामे जारी

डीएन संवाददाता

यूपी राज्य संपत्ति विभाग में लंबे अरसे से घूसखोरी की खबरें आती रहीं है। हाल ही में बिना सुविधा शुल्क के आवास आवंटन न करने का मामला उजागर होने से डाइनामाइट न्यूज़ की उन खबरों पर भी मुहर लग गयी है, जिनमें विभाग की छवि धूमिल करने के पीछे दो भ्रष्ट अधिकारियों की काली करतूतें सामने आयी थी, यह सिलसिला जारी है। डाइनामाइट न्यूज़ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट..

योगेश शुक्ला और सुधीर रुंगटा की भूमिका संदिग्ध
योगेश शुक्ला और सुधीर रुंगटा की भूमिका संदिग्ध

लखनऊ: राज्य संपत्ति विभाग में घूसखोरी का बोल बाला लंबे समय से चले आ रहा है है। यदि आप सरकारी कर्मचारी हैं औऱ आपको आवास चाहिये या फिर किसी को गेस्ट हाऊस में रूकना हो तो इन दोनों के लिये सबसे पहले आपको अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी और कुछ अधिकारियों को घूस देना होगा तभी आपका काम हो सकेगा।

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राज्य संपत्ति विभाग में लंबे समय से तैनात राज्य संपत्ति अधिकारी योगेश कुमार शुक्ला और सहायक राज्य संपत्ति अधिकारी सुधीर रूंगटा की जबरदस्त मनमानी के चलते विभाग की साख निरंतर धूमिल होती जा रही है। इन दोनों अधिकारियों की सेटिंग और पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है विभाग में तमाम शिकायतों के बाद भी दोनों अपनी कुर्सियों पर काबिज है।

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सहायक राज्य संपत्ति अधिकारी सुधीर रूंगटा भी मनमानी उतारू 

 

डाइनामाइट न्यूज़ ने पहले भी राज्य संपत्ति विभाग के इन दो महाभ्रष्ट अफसरों की पोल खोली थी। ताजा मामला इसी विभाग के अधिकारियों की लंबे अरसे से चली आ रही घूसखोरी से जुड़ा है। दरअसल यूपी के राज्य संग्रहालय निदेशक के पद पर तैनात आनंद कुमार सिंह ने बीते दिनों मुख्यमंत्री को बिना सुविधा शुल्क दिए आवास आवंटित न किए जाने की शिकायत की थी। जिस पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य संपत्ति विभाग से रिपोर्ट तलब की गई। 

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गौरतलब है कि राज्य संग्रहालय के निदेशक आनंद सिंह ने लखनऊ में सरकारी आवास के लिए मार्च 2018 में आवेदन किया था। जिस पर उन्हें 18 जून 2018 को बटलर पैलेस में एक सरकारी आवास आवंटित किया गया। हालांकि कुछ दिनों बाद ही आवंटित आवास टाइप 4 से टाइप 5 का बताकर आवंटन निरस्त कर दिया गया। इसके बाद निदेशक आनंद सिंह ने विभाग के इन भ्रष्ट अफसरों की परिक्रमा शुरू कर दी। उन्हें नए-नए बहाने बताकर परेशान किया जाने लगा। दरअसल उन्हें आवास देने के एवज में विभाग के इन दोनों अफसरों को सुविधा शुल्क की दरकार थी। जो आवास आवंटित होने के बाद भी नहीं मिल पाया था। यही वजह रही कि टाइप करके आवाज को टाइप 5 का बताकर 18 दिन बाद आवास निरस्त कर दिया गया।
बाद में जब कोई जुगत काम ना आई तब निदेशक आनंद कुमार सिंह को ऑनलाइन आवेदन करने को कहा गया। तर्क दिया गया कि ऑनलाइन आवेदन करने के 1 महीने के भीतर उन्हें आवास मिल जाएगा। मगर राज्य संग्रहालय के निदेशक आनंद कुमार सिंह ने 5 अगस्त को ऑनलाइन आवेदन भी किया। जिसकी आवेदन संख्या 111 81900 534 थी। मगर 6 सितंबर 2018 को एक महीना बीतने के बाद भी ऑनलाइन आवेदन का परिणाम सिफर रहा। 

ऐसे में संपत्ति विभाग के जिम्मेदार पदों पर बैठे इन दो अफसरों की काली करतूतों से हैरान परेशान निदेशक आनंद कुमार सिंह CM के दरबार में गुहार लगाने पहुंचे। जिस पर रिपोर्ट तलब की गई। इस पूरे मामले में अपनी जिम्मेदारी और घूसखोरी कुछ पाने के लिए एक कर्मचारी को बलि का बकरा बनाते हुए निलंबित किया गया है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हो पाई है।

पूरे मामले में पीड़ित आनंद कुमार सिंह ने बटलर पैलेस में आवास उपलब्ध कराने की CM से अर्जी लगाई है। कुल मिलाकर राज्य संपत्ति विभाग के अफसरों की वजह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अधीन विभाग और सरकार की छवि धूमिल हो रही है। इस पूरे मामले में उक्त दोनों अधिकारियों की भूमिका काफी संदिग्ध मानी जा रही है। सहायक राज्य संपत्ति अधिकारी सुधीर रूंगटा पिछली सरकार के शासन काल 9 जनवरी 2015 से अपने पद की शोभा बढ़ा रहे हैं। आखिर क्या वजह है की अभी तक यह महाशय अपनी कुर्सी पर काबिज हैं। अब यह देखने वाली बात होगी की मुख्यमंत्री की ओर से इस पूरे घूसखोरी कांड में लिप्त अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्यवाही होती है।
 

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