हिंदी
चीन ने कहा है कि उसके अधिकारियों के वीजा पर अमेरिकी प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मानदंड का गंभीर उल्लंघन है और शिनजिंयाग प्रांत में उइगर मुस्लमानों के मसले का जिक्र करना उसके आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप है।
वाशिंगटन: चीन ने कहा है कि उसके अधिकारियों के वीजा पर अमेरिकी प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मानदंड का गंभीर उल्लंघन है और शिनजिंयाग प्रांत में उइगर मुस्लमानों के मसले का जिक्र करना उसके आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप है। यहां स्थित चीनी दूतावास ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा चीन के कई संगठनों और कंपनियों को कल काली सूची में डालने के बाद अमेरिका ने मानवाधिकार के बहाने एक कदम और बढ़ते हुए आज हमारे अधिकारियों के वीजा पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी। अमेरिका का यह कदम अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूलभूत मानदंड का गंभीर उल्लंघन है और हमारे आतंरिक मामलों में दखल के साथ-साथ हमारे हितों के लिए नुकसानदायक भी है।
यह भी पढ़ें:राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष पूरे होने पर शी जिनपिंग और किम जोंगकी एक दूसरे काे बधाई
इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने चीन के शिनजियांग प्रांत में 10 लाख से अधिक मुसलमानों के साथ क्रूर एवं अमानवीय व्यवहार करने और उन्हें बलपूर्वक हिरासत में रखने को लेकर चीन की सरकार और कम्युनिस्ट पार्टी के अधिकारियों के खिलाफ वीजा संबंधी प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। अमेरिका ने सोमवार को उइगर मुसलमानों के साथ क्रूर एवं अमानवीय व्यवहार पर चिंता जाहिर करते हुए चीन की 28 संस्थाओं एवं संगठनों काे काली सूची में डालने की सोमवार को घोषणा की। काली सूची में डाले गये चीन के संगठनों में सरकारी एजेंसियां और सर्विलांस उपकरण बनाने में माहिर कंपनियां भी शामिल हैं।
यह भी पढ़ें: 50वें अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म समारोह में अमिताभ बच्चन होंगे सम्मानित
अब यह संगठन अमेरिका की अनुमति के बिना उसके उत्पादों को खरीद नहीं सकते। अमेरिकी वाणिज्य विभाग के मुताबिक काली सूची में डाले गये चीन के संगठन मानवाधिकार के हनन और दुरुपयोग के मामलों में फंसे हुए हैं। उल्लेखनीय है कि अमेरिका और चीन के शीर्ष प्रतिनिधियों के बीच गुरुवार 10 अक्टूबर से व्यापार वार्ता के अगले दौर की वार्ता प्रस्तावित है। (वार्ता)
No related posts found.