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लखनऊः इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वकीलों की हड़ताल पर गहरी चिंता जताई है। हाई कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए वकीलों को फटकार लगाई और उत्तर प्रदेश बार काउंसिल से जवाब मांगा है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमके गुप्ता और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने जंग बहादुर कुशवाहा नामक व्यक्ति की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा, "अदालतें औद्योगिक प्रतिष्ठानों की तरह नहीं है, जहां हड़तालें हो सकती हैं। अधिवक्ताओं के कामकाज न करने से न्याय का पहिया रूक जाता है।"
बलिया से उठा मामला
हाई कोर्ट ने बलिया जिले की रसड़ा तहसील में बार-बार होने वाली हड़ताल और अदालती कामकाज में व्यवधान पर चिंता व्यक्त की है। न्यायालय ने कहा कि हड़ताल से न्याय का पहिया रुक जाता है, जिससे न्याय के दुश्मनों को खुशी होती है।
बार काउंसिल से मांगा जवाब
इस दौरान न्यायालय ने कहा कि औद्योगिक प्रतिष्ठानों में मजदूरों की हड़ताल को उचित ठहराया जा सकता है। लेकिन जब अदालती कामकाज की बात आती है तो ऐसी हड़तालों को किसी भी कीमत पर उचित नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय ने वकीलों की हड़ताल को लेकर यूपी बार काउंसिल से जवाब मांगा है।
Published : 1 February 2024, 5:32 PM IST
Topics : Allahabad High Court Latest Hindi News strikes UP News Uttar Pradesh Bar Council इलाहाबाद उच्च न्यायालय उत्तर प्रदेश बार काउंसिल बलिया हड़ताल