ब्रिटेन में भारतीय मूल के डॉक्टर के रॉक बैंड की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही

ब्रिटेन सरकार से वित्तपोषित राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) में कार्यरत भारतीय मूल के एक चिकित्सक ने कोविड-19 महामारी के कारण लागू लॉकडाउन के दौरान ‘गुल्ज’ नाम से एक रॉक बैंड शुरू किया था जिसकी लोकप्रियता अब लगातार बढ़ रही है। पढ़िये डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

Updated : 29 December 2023, 1:00 PM IST
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लंदन:  ब्रिटेन सरकार से वित्तपोषित राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) में कार्यरत भारतीय मूल के एक चिकित्सक ने कोविड-19 महामारी के कारण लागू लॉकडाउन के दौरान ‘गुल्ज’ नाम से एक रॉक बैंड शुरू किया था जिसकी लोकप्रियता अब लगातार बढ़ रही है।

डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के मुताबिक गुलजार (गुल्ज) सिंह धनोया (25) ने विश्वविद्यालय में मेडिकल की पढ़ाई के दौरान ‘गुल्ज’ नाम से इंडी-रॉक बैंड शुरू किया था। एनएचएस चिकित्सा पेशेवरों से चार सदस्य अब इस बैंड का हिस्सा हैं और धनोया बैंड के प्रमुख गायक एवं गीतकार हैं।

गुल्ज ने इस सप्ताह ‘बीबीसी एशियन नेटवर्क’ से कहा, ‘‘विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान यह आसान था। मेरे पास काफी समय था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मैंने (महामारी के दौरान के) कुछ गीतों को जारी करने का फैसला किया। मैं वाकई बहुत घबराया हुआ था। मैंने इसे सोशल मीडिया पर साझा किया और फिर इसे एक सप्ताह के लिए अपने फोन से हटा दिया। मुझे चिंता थी कि मेरे साथी इसके लिए मुझे डांटेंगे। सौभाग्य से, सब अच्छा रहा।’’

धनोया के एक गीत को स्थानीय रेडियो स्टेशनों ने प्रसारित किया जिसके बाद गुल्ज को कार्यक्रम प्रस्तुत करने के प्रस्ताव मिलने लगे। इसके बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) से अपने दोस्तों को बैंड में शामिल किया जिन्होंने पूरे लंदन में बेहद सफल शो किए।

डॉक्टर के व्यस्त पेशे में संगीत के लिए समय निकालना आसान नहीं है।

धनोया ने कहा, ‘‘हम इस बात को समझते हैं कि अस्पताल के मरीज प्राथमिकता में हमेशा पहले आते हैं और हमें अपने रियाज के समय में थोड़ा लचीलापन लाने की जरूरत होती है। जैसे एक सप्ताह मैं रात की पाली में रहूंगा और फिर अगले सप्ताह कोई और होगा। हम इस मामले में एक-दूसरे का थोड़ा सहयोग कर सकते हैं और छुट्टी के दिनों में हम सिर्फ संगीत पर ध्यान केंद्रित करते हैं।’’

उन्होंने कहा कि अस्पताल के कामकाज के दौरान स्थितियां कई बार तनावपूर्ण हो जाती हैं, लेकिन संगीत इनसे निपटने में मदद करता है।

 

Published : 
  • 29 December 2023, 1:00 PM IST

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