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नई दिल्ली: पितृ पक्ष श्राद्ध 13 सितम्बर से प्रारंभ होकर 28 सितंबर तक चलेगा। भाद्रपद मास की अंतिम पूर्णिमा के अगले दिन से आश्विन मास का कृष्ण पक्ष प्रारंभ होगा।आश्विन मास की आमावस्या को पितृ पक्ष श्राद्ध का अंतिम दिन होता है। इन 16 दिनों में पुत्र, भाई, पौत्र, प्रपौत्र समेत महिलाएं अपने पितरों को तृप्त करने के लिए पिंडदान करते है। पितृ ऋृण से उऋृण होने के लिए पितृ पक्ष में पुरे विधि विधान और कर्मकाण्ड सहित श्राद्ध और पिंडदान करने से पितरों को मुक्ति मिलती है।जिससे वे अपने सम्बंधियों को आशीर्वाद देते है।
आईये जानते है हमें किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे, पितृ पक्ष में हमारी पूजा बन जाये और भी खास
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1)पितृ पक्ष में पशु पक्षियों को अन्न- जल देने से विशेष लाभ होता है। इन्हें भोजन देने से पितृगण संतुष्ट होते हैं।
और हमें आशीर्वाद देते है।
2)मान्यता है कि इन दिनों में पितर किसी भी रूप में आपके घर पर आ सकते हैं, भूलकर भी अपने दरवाजे पर आने वाले किसी भी जीव का निरादर ना करें।
उन्हें कुछ न कुछ खाने को अवश्य दिया करे।
3)श्राद्ध एवं तर्पण क्रिया में काले तिल का बड़ा महत्त्व है। श्राद्ध करने वालो को पितृ कर्म में काले तिल का इस्तेमाल करना चाहिए। लाल एवं सफ़ेद तिल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
4) जो व्यक्ति पितरों का श्राद्ध करता है उसे पितृ पक्ष में ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। इस दौरान शाकाहारी भोजन ही करना चाहिए।
5)पितृ पक्ष में पितरों को प्रसन्न करने के लिए ब्राह्मणों को भोजन करवाने का नियम है। भोजन पूर्ण सात्विक एवं धार्मिंक विचारों वाले ब्राह्मण को ही करवाना चाहिए।
6) हिन्दू धर्म कि मान्यता के अनुसार गया प्याग, बद्रीनाथ में श्राद्ध एवं पिंडदान करने से पितरो को मुक्ति मिलती है। जो लोग इन स्थानों पर पिंडदान या श्राद्ध नहीं कर सकते वो अपने घर के आंगन में जमीन पर कहीं भी तर्पण कर सकते हैं। लेकिन किसी और के घर की जमीन पर तर्पण नहीं करना चाहिए।
8)पितृ पक्ष में भोजन करने वाले ब्राह्मणों के लिए भी कुछ विशेष नियम है जैसे श्राद्ध का अन्न ग्रहण करने के बाद कुछ भी नही खाना चाहिए। इस दिन अपने घर में भी भोजन करने से परहेज करना चाहिए।
Published : 14 September 2019, 6:41 PM IST
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