एसडीएम आफिस में LIVE मारपीट से सरकार की जबरदस्त किरकिरी.. जिम्मेदारों ने रचा अंजान बनने का ढ़ोंग

शिवेंद्र चतुर्वेदी

जरा सोचिये जिस राज्य के मुखिया लखनऊ में बैठकर 24 घंटे आम जनता की भलाई में बीता रहे हों उन्हीं के राज में एक डकैत किस्म का एसडीएम खुलेआम गरीब जनता से रंगदारी की तर्ज पर धनउगाही का नंगा खेल खेल रहा हो और इससे आजिज जनता इस भष्ट अफसर के कार्यालय में सरेआम खून-खराबे पर उतर आये तो फिर व्यवस्था का क्या होगा.. इससे भी बड़ी बात जिले के जिम्मेदार बड़े अफसर इन सब बातों से अंजान बनने का ढ़ोंग करें तो भाजपा सरकार की आगामी चुनावों में बैण्ड बजना तो तय है। एक्सक्लूसिव रिपोर्ट..


महराजगंज: कलेक्ट्रेट भवन में बुधवार की सुबह ऐसा अभूतपूर्व नजारा देखने को मिला जिसकी कल्पना भी एक ईमानदार मुख्यमंत्री के राज में नही की जा सकती। 2 अक्टूबर 1989 को जिला बनने के बाद पहली बार एसडीएम के रंगदारी भरी रिश्वतखोरी को लेकर उसके दफ्तर में पीड़ित गरीब जनता खून-खराबे पर आमादा हो गयी और जमकर लात-घूसे चले और मारपीट हुई। ये समूची वारदात डाइनामाइट न्यूज़ के कैमरे में लाइव रिकार्ड हो गयी।

महराजगंज: महाभ्रष्ट SDM की घूसखोरी का सरेआम फूटा भांडा, जमकर चले लात-घूसे, मारपीट का LIVE वीडियो

अपने डकैती भरे कारनामों के लिए पूरे प्रदेश भर में बदनाम व कुख्यात पीसीएस अफसर ज्ञानेश्वर प्रसाद के काले-कारनाामों के चलते महराजगंज जिला पूरे उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के सारे रिकार्ड तोड़ चुका है। इससे भी दुस्साहसिक बात कि महीनों से इस एसडीएम का आतंक जनता के सिर चढ़कर बोल रहा है लेकिन इसके संरक्षक बन कर बैठे जिले के बड़े अफसर सब कुछ जानते हुए भी ऐसे अंजान बने हैं जैसे घूसखोरी तो छोड़िये सदर एसडीएम का नाम तक न जानते हों। यह रहस्यमय चुप्पी इस बात की ओर खतरनाक इशाारा कर रही है कि यह इस भ्रष्ट एसडीएम को जिले के बड़े अफसरों को खुला संरक्षण प्राप्त है कि लूट सको तो लूट लो..दोनो हाथ से लूटो.. जमकर जिले को लूटो..कोई कुछ नही कहेगा।

अपने कार्यालय में बैठकर जनता के हकों पर डाका डालने वाला यह मछलीखोर एसडीएम गरीब जनता से काम करने के नाम पर मछली मंगवाकर खाता है और गैरकानूनी नीली बत्ती, प्रेशर हार्न और डबल हूटर के नशे में मगरुर इस अफसर की जरा बेशर्मी तो देखिये कि यह कैसे सिस्टम को खुली चुनौती देते हुए कहता है..हिस्सा तो ऊपर तक अफसरों को पहुंचाता हूं.. शिकायत और मीडिया में छपने से कोई क्या बिगाड़ लेगा?

आम जनता को राहत तभी मिलेगी जब इसके सम्पूर्ण नौकरी के कार्यकाल की सीबीआई से जांच होगी औऱ यह जेल की सलाखों के पीछे जायेगा।

पोखरों के पट्टों के नाम पर सदर तहसील को लूट लिया गया है। जब पीड़ित..बड़े अफसरों के पास एसडीएम की शिकयत लेकर जाते हैं तो बड़े और जिम्मेदार अफसर चुप्पी साध लेते हैं। आखिर क्यों?

पीड़ित जनता परेशान है और यह अपने न्यायालय में कभी नही बैठते। विपक्षी पार्टी से मिलकर तारीख दर तारीख देने का काला खेल खेलते हैं और जिस मामले में सेटिंग हो जाती हैं उसका फैसला अपने घर पर ही लिखवा डालते हैं। 

बड़ा सवाल कब जेल जायेगा जनता के हितों पर डाका डालने वाला महाभ्रष्ट एसडीएम ज्ञानेश्वर प्रसाद?

 

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