
रायबरेली: जनपद के पशु चिकित्सा विभाग पर जिलाधिकारी द्वारा बनाई गई तीन सदस्यों की कमेटी की जांच के बाद अब लोकायुक्त व विजिलेंस की भी जांच हो रही है। यह सब जांच जिले की 80 गौशालाओं में भूसा व दवाइयों खरीद, सीवीओ आवास व आय से अधिक संपत्ति को लेकर हो रही है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार जिलाधिकारी हर्षिता माथुर ने उप कृषि निदेशक की अगुवाई में तीन सदस्यों की टीम गठित की है जो की जांच कर रही है। वहीं लोकायुक्त की जांच शुरू होते ही डीएम से रिपोर्ट मांगी गई है।
यह सब आरोप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार पर लगे हैं। आपको बता दें कि लखनऊ के रहने वाले डॉक्टर राघवेंद्र सिंह द्वारा दिसंबर 2024 में लोकायुक्त की शिकायत के बाद यह कार्रवाई हो रही है।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अनिल कुमार का कहना है कि विजिलेंस की जांच नहीं हो रही है। लोकायुक्त व डीएम द्वारा गठित टीम को जांच में सहयोग किया जा रहा है।
डॉ राघवेंद्र के द्वारा जो शिकायत की गई है वह झूठी है। भूसा क्रय गौ संरक्षण समिति द्वारा किया जाता है। ग्राम प्रधान व सचिव इसे करते हैं। यहां पर एक टेंडर किया था। इसके आपूर्तिकर्ताओं द्वारा भूसा की आपूर्ति की जाती है। जिसका सीधा भुगतान आरटीजीएस के जरिए लखनऊ से होता है। जब से वे रायबरेली में हैं तब से उन्होंने मकान किराया भत्ता नही लिया है। दवाई व अन्य सामग्री की खरीद की जाती है। जेम पोर्टल से सामग्री की खरीद की जाती है।
उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता डॉक्टर राघवेंद्र डॉ. इंदुबाला जो के पूर्व में 9 साल से अधिक नसीराबाद में बतौर पशु चिकित्सक तैनात थी इनके द्वारा अपनी ड्यूटी नहीं की गई। मेरे द्वारा चेतावनी देने के बाद वे मुझे धमकी देती रही। इसी क्रम में मैंने डीएम के निर्देश पर गौशाला व आवास सरकारी भवन की जांच की तो वे 2023 में लगातार बिना बताए गायब रहीं।
मेरे द्वारा 9 दिन का वेतन रोका गया था। इन्ही पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर शिकायत की गई है। हमारी तरफ से कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है। हम हर तरह की जांच में सहयोग कर रहे हैं
Published : 5 February 2025, 5:15 PM IST
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