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नई दिल्ली: गणेश चतुर्थी का पर्व पास आ रहा है। महाराष्ट्र में धूमधाम से गणेश महोत्सव का त्योहार मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी के मौके पर लोग घरों में भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना करके पूजा-अर्चना करते हैं।
ये तो सभी को मालूम है कि भगवान गणेश का मुख एक गज के मुख की तरह नजर आता है। लेकिन क्या आपको इसके पीछे की वजह पता है। भगवान गणेश का मुख गज के मुख में एक घटना के बाद परिवर्तित हुआ।
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ये है कथा
पौराणिक कथा के मुताबिक एक बार की बात है कैलाश पर्वत पर माता पार्वती स्नान के लिए जा रही थी। उन्हें जब मालूम पड़ा कि स्नानघर के बाहर रखवाली करने वाला कोई नहीं है तो उन्होंने भगवान गणेश को रखवाली करने का आदेश दिया।
माता की आज्ञा का किया पालन
माता पार्वती ने उनको आदेश दिया कि किसी को भी अंदर आने की आज्ञा न दी जाए। मां की आज्ञा का पालन करते हुए पुत्र गणेश रखवाली के लिए खड़े हो गए। रखवाली के दौरान ही भगवान शिव आ गए।
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पुत्र का सिर धड़ से किया अलग
भगवान शिव ने अंदर जाने की बात कही तो भगवान गणेश ने उन्हें रोक दिया। काफी आग्रह करने के बाद भी जब वह नहीं माने तो भगवान शिव को क्रोध आ गया और उन्होंने गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया।
भगवान शिव ने दिया वरदान
माता पार्वती को जब पता चला कि उनके बेटे का सिर कट गया है तो वह भगवान शिव से नाराज हो गई। उन्होंने शिवजी से गणेश को सही सलामत करने की मांग की। इसके बाद भगवान शिव पुत्र गणेश के धड़ पर गजमुख यानी हाथी का सिर जोड़ते हुए वरदान दिया कि वह विघ्नहर्ता के रूप में जाने जाएंगे। इतना ही नहीं हर पवित्र कार्य के पहले सबसे पहले भगवान गणेश का ही पूजन किया जाएगा।
Published : 24 August 2022, 3:32 PM IST
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