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जिले में पिछले कुछ दिनों से प्रशासन द्वारा चलाये जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान से लोग सहम से गये है, आलम यह है कि कई लोग खुद ही अपना अतिक्रमण हटाने में जुटे हुए है। अतिक्रमण अभियान के कारण ड्रिल मशीनों की कीमत समेत मजदूरी में भारी इजाफा हो गया है। पूरी खबर..
फतेहपुर: प्रशासन द्वारा शुरू किये गये अतिक्रमण हटाओ अभियान से पूरे शहर में अवैध कब्ज़ेदारों की सांसे थमी हुई हैं। अतिक्रमण के खिलाफ जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों ने कारोबरियों समेत आम जनता की नींद उड़ा कर रख दी है। प्रशासन के बुलडोजर के खौफ से सहमे कारोबारी और आम जनता कई जगहों पर खुद ही अतिक्रमण हटाते देखे जा सकते हैं।
फतेहपुर में पिछले कुछ दिनों से प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन अब तक कई अवैध कब्जे ढ़हा चुका है। शहर में कई प्रतिष्ठान जमीदोंज हो चुके हैं। सड़क शहर भर में सड़क के दोनों ओर जगह-जगह मलबे के ढ़ेर लगे हुए है।

अतिक्रमण के बाद घरों और दुकानों के आगे मलबे के ढ़ेर हटाने के लिये मजदूरों की मांग बढ़ गयी है। मजदूर भी मौके को देखते हुए ज्यादा मजदूरी की मां कर रहे हैं।
ड्रिल मशीनों की बढ़ती मांग को देखते हुए दुकानदारों ने भी ड्रिल मशीन का किराया दोगुना कर दिया है, जो मशीन पहले 400 रुपये के किराये पर मिल जाती थी उसके लिये अब 1000 से 1200 रुपये देने पड़ रहे हैं। प्रशासन द्वारा अतिक्रमण के लिये लगाये गये लाल निशान को देख कर कई लोग खुद अतिक्रमण हटा रहे हैं, जिसके लिये उन्हें इन ड्रील मशीनों की जरूरत पड़ रही है।
पिछले दिनों सपा के पूर्व सांसद राकेश सचान ने कब्ज़ेदारों को राहत दिलाने के लिये जिलाधिकारी से मिलकर एक हफ्ते का समय मांगा था लेकिन जिलाधिकारी ने उनकी मांग को भी ठुकरा दिया है।
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