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नई दिल्लीः त्यौहारों के साथ-साथ शादियों का भी सीजन चल रहा है। हर तरफ चहल-पहल चल रही है। लेकिन दिल्ली के उत्तर-पश्चिमी ग्रामीण इलाकों खासतौर पर किराड़ी, निठारी, मुबारकपुर, नरेला, कराला, बवाना के साथ-साथ दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के नजफगढ़, महिपालपुर और कापसहेड़ा सेंट्रल दिल्ली के टोडापुर,दशहरा गांव में युवाओं में बढ़ रही बेरोजगारी और बेकारी के चलते यहां शादी- ब्याह के लाले पड़ गये है।
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यहां लड़कों की शादी इसलिये नहीं हो रही क्योंकि उनके पास स्थाई रोजगार नहीं है। पहले जहां दिल्ली से सटे हरियाणा और यूपी से यहां रिश्ते आते थे वहीं अब बेरोजगारी से तंगहाली के शिकार लड़कों के परिवार वालों को ये चिंता सता रही है कि आखिर कब उनके घर में भी सहनाई बेजगी और उनके लाडले की शादी हो पायेगी। इन गांवों के बुजुर्गों का कहना है कि पहले जहां लोग एक दूसरे की खैरियत पूछ लिया करते थे अब हालात ये हो गये हैं कि जब भी कोई रिश्तेदार घर पर आता है तो यहीं पूछता है कि लड़के के रिश्ते की बात हुई कहीं कि नहीं।
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इसकी एक बड़ी वजह इन देहात इलाकों में लड़कों और लड़कियों के अनुपात में कमी होना भी है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके पास जहां पहले भरी पूरी अपनी पुस्तैनी जमीन हुआ करती थी उसे दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने सस्ते दामों पर उनसे खरीद लिया। इससे जो उनको मुआवजा मिला उन्होंने इसे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में लगा दिया और किसी ने इससे अपना काम धंधा में खोला।
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लेकिन इस मुआवजे से जहां कुछ सालों तक उनका आर्थिक पक्ष मजबूत हुआ वहीं समय के साथ-साथ सरकार ने सरकारी नौकरियों में न सिर्फ कटौती कर दी बल्कि जो युवा दिल्ली पुलिस, अर्धसैनिक बलों में और फौज में जाकर देश सेवा के सपने देख रहे थे समय पर इन क्षेत्रों में नौकरी नहीं निकलने से उनकी दुर्गती हो गयी है। इनकी उम्र अब देशसेवा की भर्ती के लिये ओवरएज हो गई है।

जिससे यहां इनके लिये रास्ते बंद हो गये हैं। वहीं जब इन ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कों के लिये रिश्ते आते भी है तो सबसे पहले लड़की वाले यहीं पूछते है कि क्या लड़का सरकारी नौकरी में है या फिर ऐसे ही छोटी-मोटी प्राइवेट नौकरी कर रहा है। सरकारी नौकरी है तो रिश्ता समझो झट से हो जाता है लेकिन प्राइवेट नौकरी वाले छोरो के लिये तो शादी जैसा एक सपना बनकर रह गया है।
जहां पहले दिल्ली के इन देहात इलाकों में फरीदाबाद, सोनीपत, मेवात, पानीपत, झज्जर, बागपत आदि जगहों से रिश्ते आते थे अब तो यहां की लड़की वालों ने इस तरफ से अपना मुंह ही मोड़ लिया है। इन ग्रामीण क्षेत्रों के बुजुर्गों का कहना है कि हमारे गांवों के लड़कों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है इन गांवों से खेलों में कई ऐसे लड़के भी निकले हैं जिन्होंने देश-दुनिया में इन ग्रामीण क्षेत्रों का नाम रोशन किया है।
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लेकिन अब हर कोई तो खेलों में आगे नहीं बढ़ सकता। बात अगर पढ़ाई की करें तो इन लड़कों ने पढ़ाई-लिखाई भी बड़े-बड़े प्राइवेट कॉलेजों और सरकारी कॉलेजों से की है लेकिन कमी है तो एक ढंग के स्थाई रोजगार की जिस वजह से रिश्ते होते-होते रह जा रहे हैं।
बेरोजगार युवकों के पास अब खेती का भी काम नहीं बचा क्योंकि खेत तो पहले ही डीडीए को हम बेच चुके हैं। यहीं वजह है कि इन ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी से तंग युवा गलत राह अपना रहे हैं। वो नशे की लत का शिकार हो रहे हैं, जिससे दिल्ली और एनसीआर में अपराध का ग्राफ बढ़ रहा है जो कि दिल्ली के लिये और इन ग्रामीण इलाकों के लिये चिंता का विषय है।
Published : 23 October 2018, 6:47 PM IST
Topics : ग्रामीण क्षेत्र दिल्ली पश्चिमी दिल्ली प्राइवेट नौकरी बुजुर्ग बेरोजगारी रिश्ता लड़के शादी सरकारी नौकरी
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