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चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की होती है। इस दौरान माता की सभी पसंद की सामाग्री का भोग लगाया जाता है। डाइनामाइट न्यूज़ की इस रिपोर्ट में जानिए मां शैलपुत्री की पूजा का पूरा विधि-विधान
नई दिल्ली: चैत्र नवरात्रि पर नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। चैत्र नवरात्रि के प्रथम दिन मां दुर्गा के स्वरूप शैलपुत्री रूप का पूजन किया जाता है।
मां शैलपुत्री का भोग
मां शैलपुत्री को गाय के घी और दूध से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है। चैत्र नवरात्रि पर मां शैलपुत्री को गाय के दूध से बनी बर्फी, खीर या घी से बने हलवे का भोग लगाया जाता है।
इसके अलावा आप गाय के दूध से बनी बर्फी को अपने व्रत के दौरान भी खा सकते हैं।
मां शैलपुत्री की पूजा विधि और मंत्र
मां शैलपुत्री की पूजा शुरू करने से पहले अपने पूजा घर को साफ कर के घर के मंदिर या माता की चौकी के पास पूजा के कलश स्थापना करें।
उसके बाद भगवान गणेश की पूजा कर माता की अखंड ज्योति जलाएं। मां शैलपुत्री का पसंदीदा रंग सफेद रंग है। इसके अलावा नारंगी और लाल कलर का भी उपयोग पूजा के लिए कर सकते हैं।
इस दौरान मां शैलपुत्री को कुमकुम, सफेद चंदन, सिंदूर, पान, हल्दी, अक्षत, सुपारी, लौंग, नारियल और 16 श्रृंगार का सामान अर्पित करें। मां शैलपुत्री को उनके पसंद के सफेद रंग के फूल, सफेद मिठाई का ही भोग लगाएं।
इसके बाद माता की आरती करें। शाम को भी मां शैलपुत्री की आरती करें और लोगों को प्रसाद दें।
आरती के बाद या आरती के दौरान बाद मां शैलपुत्री के इस मंत्र का जाप करें
ओम देवी शैलपुत्र्यै नमः ह्रीं शिवायै नम: वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्.
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
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