वाराणसी: किशोरियों में माहवारी का संकोच खत्म करने के लिये जागरूकता कार्यक्रम

ग्रामीण क्षेत्रों में किशोरियां माहवारी को लेकर अक्सर चुप्पी साध लेती है, जिस कारण कई बार कई तरह की समस्याएं भी पैदा हो जाती है। मासिक धर्म या पीरियड्स को लेकर किशोरियों को जागरूक करने के लिये एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पूरी खबर..

Updated : 29 July 2018, 4:46 PM IST
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वाराणसी: एनएचआरएम के तहत चोलापुर स्थित राजकीय गर्ल्स इण्टर कालेज में किशोर व किशोरी पोषण स्वास्थ्य एवं स्वच्छता परियोजना के अंतर्गत पियर एजुकेटर सम्मान दिवस का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में किशोरियों को माहवारी के दौरान होने वाली समस्याओं और आंशकाओं को लेकर भी सहेलियों व माता अ अन्य परिजनों से खुलकर बात करने के लिये प्रेरित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि पहली बार माहवारी आने पर किशोरी यह बात अपने माता व अन्य परिजनों से संकोचवश छुपाती हैं इसलिये इस कार्यक्रम का उद्देश्य बातचीत का माध्यम से उनके संकोच को खत्म करना है औऱ उन्हें जागरूक बनना है। 

कार्यक्रम का उद्देश्य किशोर-किशोरियों को स्वास्थ्य, सफाई व हाइजीन, सेनेटरी नैपकिन के उपयोग और माहवारी के दौरान होने वाली समस्याओं से बचाव के लिये जागरूक करना था। कार्यक्रम में माहवारी के दौरान किशोरियों को खुलकर अपने सहेलियों व माता पिता से चर्चा करना जैसे जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया गया।  इस मौके पर प्रशिक्षण प्राप्त पियर एजुकेटर को भी सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में परियोजना में कार्यरत पियर एजुकेटर को प्रशस्ति पत्र तभी प्रदान किया गया।

 

 

इस परियोजना  के तहत विगत तीन वर्षो से चोलापुर ब्लॉक के 37 ग्राम पंचायत में काम करते हुए लगभग दस हज़ार पचहत्तर किशोर-किशोरियों को इस योजना का लाभ मिला है, जिससे गांव के किशोर-किशोरी के प्रैक्टिस और नॉलेज से सकरात्मक परिवर्तन आया है।

इस अवसर पर दिल्ली से आयी ममता संस्था की डिप्टी डायरेक्टर प्रियंका श्रीनाथ ने बताया कि हमारा उद्देश्य है कि हम 10 वर्ष से लेकर 19 वर्ष तक के किशोर किशोरियों को उनके शारीरिक बदलाव और पोषण के साथ साथ हाइजीन में सेनेटरी नैपकिन के बारे में जागरूक करें। प्रायः ऐसा देखा जाता है कि खुले में स्नान के दौरान अपने शरीर के अंगों को पूरी तरह से साफ नहीं कर पाते और जानकारी के अभाव में महावारी के दौरान किसी भी चीज का प्रयोग कर लेती है, जिससे उनको इंफेक्शन का खतरा रहता है। क्योंकि पहली बार माहवारी आने पर यह बातें वह अपने माता व अन्य लोगों से संकोचवश छुपाती हैं। हम अपने कार्यक्रम के माध्यम से उनके संकोच को खत्म करते है। 

इस कार्य मे भाग लेने वाली मरियम ने कहा कि इस संस्था में प्रशिक्षण लेने के बाद हम लोगों ने यह जाना कि वो कौन कौन से आहार है, जो हमारे स्वास्थ्य को ठीक रखेंगे। इसके अलावा सेनेट्री और नैपरिन से होने वाले फायदों की जानकारी मिली।

कार्यक्रम में पहुँचे एडिशनल सीएमओ डॉ एके गुप्ता ने बताया कि माहवारी के दौरान किशोरियों द्वारा गंदे कपड़े का प्रयोग किया जाता है, जिससे कि इंफेक्शन का खतरा हो जाता है, क्योंकि माहवारी के दौरान बच्चों के माता-पिता उनको कुछ जानकारी नहीं दे पाते औऱ संकोच के कारण वे भी कुछ बता नहीं सकती, जिससे संक्रमित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। 

Published : 
  • 29 July 2018, 4:46 PM IST

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