सीएम योगी आदित्यनाथ के इलाके में सौ से अधिक गायों की सनसनीखेज मौत, गौरक्षक खामोश

शिवेंद्र चतुर्वेदी

यदि एक गाय की संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो जाय तो तथाकथित गौरक्षक संदेह के घेरे में आने वाले की जान लेने वाले पर उतारु हो जाते हैं। महराजगंज जिले में एक सप्ताह के भीतर सौ से अधिक गायों की मौत हो चुकी हैं और इसकी जिम्मेदारी लेना तो छोड़िये.. कोई यह मानने को तैयार ही नही कि गायों की मौत हुई है। ग्राउंड जीरो से डाइनामाइट न्यूज़ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट..


महराजगंज: सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ के इलाके गोरखपुर से सटे महराजगंज जिले में स्थित निचलौल तहसील के मधवलिया गोसदन में पिछले कुछ दिनों में 100 से अधिक गायों की सनसनीखेज तरीके से रहस्यमय मौत हो गयी है। 

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डाइनामाइट न्यूज़ पर यह खबर वायरल होने के बाद आनन-फानन में रात के अंधेरे में करीब आधा दर्जन जेसीबी मशीनों को लगाकर मृत गायों की लाशों को जमीन में गाड़ने का युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है।

डाइनामाइट न्यूज़ के खोजी व जाबांज रिपोर्टर्स की टीम जब शनिवार की शाम 6 बजे गोसदन परिसर में पहुंची तो कड़ाके की ठंड में चारों तरफ सन्नाटा और अंधेरा पसरा हुआ था। इस सन्नाटे और अंधेरे को यदि कोई चीर रहा था तो आधा दर्जन जेसीबी मशीनों की लाइट और आवाज। (देखें चौथा वीडियो)

जेसीबी मशीन के ड्राइवर ने खोली पोल
इन्हीं में से एक विशुनपुरा गांव के निवासी जेसीबी के ड्राइवर ने जिला प्रशासन की काली-करतूतों को डाइनामाइट न्यूज़ के कैमरे पर खोल कर रख दिया। इसने जो बताया वह प्रशासन के दावों के ठीक उलट है। इसने बताया कि वह एक बजे दिन में आया है और अकेले अपनी जेसीबी से 50 से 60 मृत गायों को अभी तक जमीन में गाड़ चुका है। (देखें दूसरा वीडियो) उसने बताया कि मौके पर 3 जेसीबी मशीन रात के अंधेरे में मृत गायों को गाड़ने का काम कर रही हैं। 

बेरहमी से घसीटते हुए गाड़ा जा रहा है मृत गायों को
सबसे आश्चर्यजनक बात यह थी कि मृत गायों को बहुत ही बेरहमी से बांस के सहारे टांग कर घसीटते हुए लाया जा रहा था (देखें पहला वीडियो) और गायों के पैर को घसीटते हुए गहरे गड्ढ़े में गिराने का काम किया जा रहा था।

आखिर कैसे हुई इतनी बड़ी संख्या में मौत
आखिरकार सौ से अधिक गायों की कैसे मौत हुई..इस सवाल का जबाव हर कोई जानना चाहता है लेकिन जिम्मेदार अफसर इस समूचे सनसनीखेज प्रकरण से अंजान बने हुए हैं। कोई भी कारण बताने को तैयार नही। 

कैमरे के पीछे.. क्या कहना है ग्रामीणों का
जिला प्रशासन के डर के मारे कोई भी ग्रामीण इन मौतों पर कुछ बोलने को तैयार नही है। जब ऑफ कैमरा आसपास के किसानों से बात की गयी तो उन्होंने सारी कलई खोलकर रख दी। इनका कहना है कि गायों की लगातार मौतें पिछले कई दिनों से हो रही हैं। गोसदन के कर्ता-धर्ता गायों की लाशों को पुआल के नीचे दबाकर रखे हुए हैं ताकि लाश सड़ने के बाद चमड़े व हड्डियों को बेचकर उससे काली कमाई कर सकें। 

चार सौ एकड़ में फैला गोसदन.. सीएम का है ड्रीम प्रोजेक्ट
यह गोसदन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट है। यह करीब चार सौ एकड़ में फैला हुआ है। सूबे में योगी सरकार आने के बाद यहां के प्रबंध तंत्र की व्यवस्था को बदलकर कर कमान नये हाथों में सौंपी गयी। कुछ महीने पहले तक यहां 350 गायें थी। अभी हाल में 150 के करीब गायों को गोरखपुर से लाकर यहां रखा गया है। यहां पर रखी गायों में कई बीमार व बूढ़ी गायें भी हैं। यहां पर चारों और कुप्रबंधन और अव्यव्स्था का आलम है। ठंड के भीषण मौसम में अधिकांश गायें खुले आकाश के नीचे अंधेरे में तड़पते हुए भूखे रहने को मजबूर हैं।

डाइनामाइट न्यूज़ के सवालों से घबराये उप जिलाधिकारी
रात के अंधेरे में जब डाइनामाइट न्यूज़ की टीम सूनसान इलाके में स्थित गोसदन पहुंची तो कड़ाके की ठंड में आग तापते मिले निचलौल तहसील के उप जिलाधिकारी देवेश गुप्त। (देखें पांचवा वीडियो) इन्होंने डाइनामाइट न्यूज़ को पहले तो कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया बाद में हिचकिचाते हुए कहे कि आज सिर्फ एक गाय मरी है और कल 6 गायें मरीं थी। पिछले एक सप्ताह में हुई मौत के आंकड़े पर उन्होंने कोई जवाब नही दिया। जब उनसे पूछा गया कि अकेले एक जेसीबी का ड्राइवर बता रहा है कि आज ही उसने 50 से 60 गायों की जमीन में गाड़ा है तो इस पर उनसे जवाब देते नही बन रहा था। बचाव में वे कहने लगे कि हम जांच करा रहे हैं और दोषियों पर रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही होगी।

क्या कहना है मधवलिया गोसदन के प्रबंधक का
जब डाइनामाइट न्यूज़ ने गोसदन के प्रबंधक जितेन्द्र पाल सिंह से बात की तो इन्होंने भी साफ कहा कि हमारे पास सिर्फ 250 गायों के रखने की जगह है। इसके बाद भी बड़ी संख्या में हमारे पास गाय गोरखपुर से भेज दी गयी। (देखें आखिरी वीडियो)

क्या तस्करी है मौतों की वजह
भारत-नेपाल और बिहार की सीमा से सटे तराई के इस इलाके में बहुत बड़े पैमाने पर गौवंशों की तस्करी होती है। तस्कर गायों के चमड़ों व हड्डियों का बड़े पैमाने पर गैरकानूनी कारोबार करते हैं। जिला प्रशासन इन सबको जानने के बावजूद न जाने क्यों अपनी आंखें मूंद रखी हैं। दबी जुबान में ग्रामीण इन रहस्यमय मौतों का कारण तस्करी कनेक्शन से जोड़ कर देख रहे हैं तो वहीं पर जिला प्रशासन मौत के आंकड़ो को झूठलाते हुए ठंड, बीमारी व गायों की बढ़ती उम्र का हवाला पर्दे के पीछे से दे रहा है।

क्यों रात के अंधेरें में चलायी जा रही हैं जेसीबी मशीनें
ग्रामीणों की बात में दम है.. नही तो क्या कारण है कि रात के घनघोर अंधेरे में युद्ध स्तर पर आधा दर्जन जेसीबी मशीनों से कड़कड़ाती ठंड में गायों को जमीन में आनन-फानन में गाड़ने का काम किया जा रहा है। यह चोर की दाढ़ी में तिनके वाली कहावत को साफ चरितार्थ कर रहा है। (देखें चौथा वीडियो)

निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच से ही संभव है दूध का दूध औऱ पानी का पानी
कुल मिलाकर गायों की मौत की असल संख्या और वजहों का खुलासा तभी संभव है जब इसकी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच जिले के बाहर की किसी एजेंसी से करायी जाय।

 

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