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महराजगंज: जनपद के सभी विकास खंडों में ग्राम्य विकास विभाग के तत्वाधान में न्यूनतम 10-10 कुओं का निर्माण मनरेगा के तहत करवाया जायेगा। ग्राम्य विकास विभाग उत्तर प्रदेश के निर्देशों के अनुपालन में सभी विकास खंडों में कुओं का निर्माण पर्यावरण, धार्मिक रीति, रिवाज परंपराओं के मद्देनजर होना है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार इस योजना के तहत कुओं का निर्माण व जीर्णोद्धार कार्य होगा। जिससे वर्षा जल संचय व सार्वजनिक सभाओं की परंपरा भी बरकरार राखी जा सके। इस कार्य से गांव में प्राकृतिक जल स्रोत की पुरानी परंपरा भी ग्रामीणों को देखने को मिलेगी।
महराजगंज के उपायुक्त श्रम रोजगार विभाग के अनुसार कुओं के सौंदरीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
बता दें, विकसित जल आपूर्ति प्रणालियों के बावजूद, कुएं अभी भी ग्रामीण भारत के लिए एक विश्वसनीय, पारंपरिक और आत्मनिर्भर जल स्रोत हैं। इनका संरक्षण और पुनर्भरण करना जल संकट से निपटने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
खुले कुएं वर्षा के पानी को सोखने और भूजल स्तर बनाए रखने में मदद करते हैं, जिससे पानी की कमी को कम किया जा सकता है। गर्मी के मौसम या सूखे के दौरान, जब नदियाँ और तालाब सूख जाते हैं, तब कुएं पानी का एक स्थायी स्रोत बने रहते हैं। कुओं का उपयोग प्राकृतिक तरीके से पानी प्राप्त करने का एक पर्यावरण के अनुकूल तरीका है, क्योंकि यह अत्यधिक भूजल दोहन को रोकने में मदद करता है।
इसलिए मनरेगा योजना के अंतर्गत प्रत्येक जनपद अपने प्रत्येक विकास खंड में न्यूनतम 10 कुओं के निर्माण एवं जीर्णोद्धार का कार्य कराएंगे।
Published : 22 March 2025, 7:04 PM IST
Topics : Maharajganj News MNREGA Rural Development Department UP News uttar pradesh Water Conservation Water Source Wells