बांस के डंडे से शुरू हुआ सफर, जौनपुर के रोहित ने 87.05 मीटर थ्रो के साथ रचा इतिहास, एशियाड 2026 के लिए भी क्वालीफाई

जौनपुर के रोहित यादव ने 65वीं नेशनल इंटर स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 87.05 मीटर भाला फेंककर नया कीर्तिमान बनाया है। इस प्रदर्शन के साथ वह भारत के नंबर-1 और दुनिया के नंबर-2 भाला फेंक खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा को भी पीछे छोड़ दिया है।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 1 July 2026, 3:59 PM IST
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Jaunpur: मेहनत, संघर्ष और लगन के दम पर जौनपुर के रोहित यादव ने भारतीय एथलेटिक्स में नया इतिहास रच दिया है। कभी बांस के डंडे से भाला फेंक का अभ्यास करने वाले रोहित अब भारत के नंबर-1 और दुनिया के नंबर-2 भाला फेंक खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने भुवनेश्वर के कलिंगा स्टेडियम में आयोजित 65वीं नेशनल इंटर स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 87.05 मीटर का शानदार थ्रो कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

87.05 मीटर के थ्रो से बनाया नया रिकॉर्ड

25 वर्षीय रोहित यादव ने प्रतियोगिता के अंतिम दिन अपने आखिरी प्रयास में 87.05 मीटर दूर भाला फेंककर सभी को चौंका दिया। इससे पहले उनके प्रयास 77.71 मीटर, 77.63 मीटर, नो मार्क, 77.51 मीटर और 79.40 मीटर रहे थे। अंतिम थ्रो में उन्होंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीत लिया। इस उपलब्धि के साथ रोहित ने दो बार के ओलंपिक पदक विजेता नीरज चोपड़ा को भी पीछे छोड़ दिया। साथ ही उन्होंने जापान के नागोया में होने वाले एशियाई खेल 2026 के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है।

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विश्व रैंकिंग में भी मिली बड़ी सफलता

रोहित यादव के इस प्रदर्शन के बाद वह विश्व रैंकिंग में दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। पहले स्थान पर श्रीलंका के रुमेश थरंगा पाथिरागे हैं, जबकि नीरज चोपड़ा चौथे स्थान पर हैं। रोहित ने बताया कि अभ्यास के दौरान वह लगातार 86 से 87 मीटर तक भाला फेंक रहे थे, लेकिन प्रतियोगिताओं में वैसा प्रदर्शन नहीं कर पा रहे थे। इस बार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया। उनके शानदार प्रदर्शन की बदौलत उत्तर प्रदेश ने पुरुष वर्ग की टीम ट्रॉफी भी अपने नाम की।

बांस के डंडे से शुरू हुआ था सफर

रोहित यादव का सफर बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। जौनपुर के अदारी डभिया गांव के रहने वाले रोहित ने महज 14 वर्ष की उम्र में बांस के डंडे से भाला फेंक का अभ्यास शुरू किया था। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने सपनों को नहीं छोड़ा और लगातार मेहनत करते रहे।

पिता ने बताया संघर्ष की कहानी

रोहित के पिता सभाजीत यादव ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति पहले अच्छी नहीं थी और वे झोपड़ी में रहते थे। इसके बावजूद उन्होंने अपने तीनों बेटों—राहुल, रोहित और रोहन—को भाला फेंक का अभ्यास कराया। शुरुआत में संसाधन नहीं थे, इसलिए बांस के डंडों से ही अभ्यास कराया गया। उन्होंने बताया कि बड़े बेटे राहुल राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं, जबकि रोहित और सबसे छोटे बेटे रोहन अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। सभाजीत यादव आज भी 60 वर्ष की उम्र में गांव के बच्चों को भाला फेंक का प्रशिक्षण देते हैं। रोहित की इस सफलता से पूरे गांव में खुशी का माहौल है और लोग इसे मेहनत व संघर्ष की बड़ी जीत मान रहे हैं।

Location :  Jaunpur

Published :  1 July 2026, 3:59 PM IST

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