हिंदी
भारतीय फुटबॉल इस समय गंभीर संकट से गुजर रहा है, क्योंकि इंडियन सुपर लीग (ISL) के भविष्य को लेकर अब भी स्पष्टता नहीं है। सीजन में देरी और अनिश्चितता के चलते सुनील छेत्री, गुरप्रीत सिंह संधू और संदेश झिंगन जैसे शीर्ष खिलाड़ियों ने FIFA से दखल देने की अपील की है।
सुनील छेत्री (Img: Internet)
New Delhi: भारतीय फुटबॉल इस समय अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। देश की प्रमुख पेशेवर फुटबॉल लीग, इंडियन सुपर लीग (ISL), का भविष्य अभी भी स्पष्ट नहीं है। जनवरी का महीना चल रहा है, लेकिन वह समय, जब फुटबॉल प्रशंसक टीवी स्क्रीन पर अपने पसंदीदा खिलाड़ियों को खेलते देखते थे, इस बार खालीपन से भरा है। ISL को लेकर बनी असमंजस की स्थिति ने न केवल घरेलू फुटबॉल ढांचे को कमजोर किया है, बल्कि खिलाड़ियों, क्लबों और प्रशंसकों सभी को गहरी चिंता में डाल दिया है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कई भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ियों ने FIFA से हस्तक्षेप करने की मांग की है। भारतीय टीम के दिग्गज खिलाड़ियों सुनील छेत्री, गुरप्रीत सिंह संधू और संदेश झिंगन ने सार्वजनिक रूप से अपनी चिंता जाहिर की है। इन खिलाड़ियों का मानना है कि मौजूदा हालात में FIFA का दखल भारतीय फुटबॉल को सही दिशा में ले जा सकता है, खासकर फ्रेंचाइजी-आधारित टूर्नामेंट के भविष्य को लेकर।
भारतीय फुटबॉल के सबसे बड़े नाम सुनील छेत्री ने कहा, “यह जनवरी है, और हमें इंडियन सुपर लीग में खेलते हुए आपके टीवी स्क्रीन पर होना चाहिए था।” उनके शब्दों में खिलाड़ियों और प्रशंसकों दोनों की निराशा साफ झलकती है।
सुनील छेत्री (Img: Internet)
वहीं, राष्ट्रीय टीम के गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू ने कहा कि खिलाड़ी इस समय फुटबॉल खेलने के बजाय डर और अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं। उनके अनुसार, यह स्थिति मानसिक रूप से खिलाड़ियों पर गहरा असर डाल रही है।
. @FIFAcom @FIFPRO @FIFPROAsiaOce @FPAI pic.twitter.com/urNqYfmVcH
— Gurpreet Singh Sandhu (@GurpreetGK) January 2, 2026
सुनील छेत्री ने आगे यह भी कहा कि खिलाड़ियों, कोचिंग स्टाफ और प्रशंसकों को मौजूदा हालात पर साफ और ठोस जानकारी मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, बिना किसी स्पष्ट दिशा के लंबे समय तक अनिश्चितता बनी रहना भारतीय फुटबॉल के लिए बेहद नुकसानदेह है। खिलाड़ियों का करियर छोटा होता है, और ऐसे में हर सीजन का महत्व और भी बढ़ जाता है।
पिछले गुरुवार को ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) को लगभग सभी ISL फ्रेंचाइजी क्लबों से पत्र प्राप्त हुए। इन पत्रों में क्लबों ने टूर्नामेंट में भाग लेने की इच्छा तो जताई, लेकिन साथ ही यह भी साफ कर दिया कि उनकी भागीदारी AIFF से मिलने वाले संतोषजनक वित्तीय और गवर्नेंस आश्वासनों पर निर्भर करेगी।
ISL क्लबों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वे किसी भी तरह की लीग प्रशासनिक फीस देने को तैयार नहीं हैं। इसके अलावा, यदि सीजन छोटा होता है, तो उससे जुड़ी परिचालन लागत की पूरी वित्तीय जिम्मेदारी AIFF को लेनी होगी। क्लबों का मानना है कि बिना इन आश्वासनों के टूर्नामेंट में भाग लेना आर्थिक रूप से जोखिम भरा होगा।
यह भी पढ़ें- कौन हैं WPL इतिहास में सबसे ज़्यादा रन बनाने वाली वो 5 खिलाड़ी?
इंडियन सुपर लीग की स्थापना 2013 में हुई थी और इसका आखिरी सीजन 2024-25 में खेला गया। पिछले एक दशक में ISL ने भारतीय फुटबॉल को नई पहचान दी, युवा खिलाड़ियों को मंच दिया और खेल की लोकप्रियता बढ़ाई। अब सवाल यह है कि क्या यह लीग आगे भी भारतीय फुटबॉल की रीढ़ बनी रहेगी, या अनिश्चितता इसे कमजोर कर देगी। आने वाले फैसले भारतीय फुटबॉल के भविष्य की दिशा तय करेंगे।