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सावन के नियम (Img- Pinterest)
New Delhi: भगवान शिव का प्रिय महीना सावन (श्रवण मास) आध्यात्मिक दृष्टिकोण से बेहद पवित्र और फलदायी माना जाता है। इस पूरे महीने में भक्त महादेव को प्रसन्न करने के लिए व्रत, जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के दौरान जितनी अहमियत पूजा-पाठ की है, उतनी ही सावधानी कुछ विशेष नियमों के पालन में भी बरतनी चाहिए। शास्त्रों में कुछ ऐसे कार्यों का उल्लेख किया गया है जिन्हें सावन में करना सख्त मना है। आइए जानते हैं कि इस पावन महीने में किन गलतियों से बचना चाहिए।
सावन के महीने में सात्विकता का पालन करना सबसे पहला और जरूरी नियम है। इस दौरान मांस, मदिरा (शराब), प्याज और लहसुन का सेवन भूलकर भी नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि इन चीजों के सेवन से शरीर और मन में तामसिक प्रवृत्तियां बढ़ती हैं, जिससे पूजा का फल नष्ट हो जाता है। साथ ही, इस दौरान बैंगन, हरी पत्तेदार सब्जियां और कढ़ी खाने से भी परहेज करने की सलाह दी जाती है।
भगवान शिव की पूजा बहुत सरल मानी जाती है, लेकिन उनकी पूजा में कुछ चीजों का प्रयोग वर्जित है। सावन में शिवलिंग पर कभी भी तुलसी के पत्ते, हल्दी, सिंदूर या केतकी के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए। धार्मिक ग्रंथों के मुताबिक, तुलसी माता भगवान विष्णु को प्रिय हैं और जालंधर की पत्नी थीं, इसलिए शिव पूजा में इनका उपयोग नहीं होता। हमेशा बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और जल ही अर्पित करें।
सावन केवल खान-पान के संयम का नाम नहीं है, बल्कि मानसिक और व्यवहारिक शुद्धता का भी पर्व है। इस दौरान किसी का अपमान करना, बुजुर्गों-महिलाओं का अनादर करना या किसी के प्रति मन में द्वेष भाव रखना पाप के बराबर माना गया है। घर आए भिक्षुक या बेजुबान जानवरों (विशेषकर नंदी यानी बैल) को मारना या भगाना महादेव को अप्रसन्न कर सकता है।
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शास्त्रों के अनुसार सावन के महीने में शरीर पर तेल लगाना, दाढ़ी-बाल कटवाना और दिन के समय सोना वर्जित माना गया है। यह समय भक्ति, ध्यान और आत्म-संयम का है। इस पावन काल में भक्ति भाव से शिव का ध्यान करने पर सभी प्रकार के दोषों से मुक्ति मिलती है।
Location : New Delhi
Published : 1 August 2026, 3:59 PM IST
Topics : lord shiva Sawan 2026 Sawan Rules Shiva Puja