Mohini Ekadashi Vrat Katha: पाप नाश और मोक्ष दिलाने वाला पवित्र व्रत, विस्तार से जानें महत्व

मोहिनी एकादशी व्रत वैशाख शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। यह भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप को समर्पित है। व्रत कथा सुनने और पाठ करने से पाप नष्ट होते हैं, मोक्ष की प्राप्ति होती है और सहस्त्र गोदान के समान पुण्य मिलता है।

Updated : 27 April 2026, 10:34 AM IST
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New Delhi: मोहिनी एकादशी का व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। यह व्रत वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप को समर्पित होता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि इस एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

भगवान विष्णु और मोहिनी स्वरूप की आराधना

मोहिनी एकादशी के दिन श्रद्धालु भगवान विष्णु के मोहिनी स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से करने से व्यक्ति को मोहजाल और पापों से मुक्ति मिलती है। पुराणों में इसे अत्यंत कल्याणकारी व्रत बताया गया है, जो जीवन के सभी कष्टों को दूर करने की शक्ति रखता है।

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युधिष्ठिर और श्रीकृष्ण संवाद

पौराणिक कथा के अनुसार युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से मोहिनी एकादशी के महत्व के बारे में प्रश्न किया था। तब श्रीकृष्ण ने बताया कि यही प्रश्न भगवान श्रीराम ने महर्षि वशिष्ठ से पूछा था। वशिष्ठ जी ने राम को बताया था कि वैशाख शुक्ल पक्ष की यह एकादशी सभी पापों का नाश करने वाली है और इसके व्रत से मनुष्य पापों के बंधन से मुक्त हो जाता है।

भद्रावती नगर और धनपाल वैश्य की कथा

कथा के अनुसार सरस्वती नदी के तट पर स्थित भद्रावती नामक नगर में चंद्रवंशी राजा द्युतिमान राज्य करते थे। उसी नगर में धनपाल नामक एक समृद्ध वैश्य रहता था, जो धर्म-कर्म में लीन रहता था। वह कुएं, बगीचे, मठ और जलाशय बनवाकर जनसेवा करता था और भगवान विष्णु का भक्त था।

धनपाल के पांच पुत्र थे, जिनमें सबसे छोटा पुत्र धृष्टबुद्धि अत्यंत दुष्ट स्वभाव का था। वह पाप कर्मों में लिप्त रहता था और वेश्याओं के संगत में समय व्यतीत करता था। उसके दुर्व्यवहार के कारण पिता ने उसे घर से निकाल दिया और परिवार ने भी उसका त्याग कर दिया। इसके बाद वह कष्टों में जीवन व्यतीत करने लगा।

महर्षि कौण्डिन्य का उपदेश

एक दिन भटकते हुए धृष्टबुद्धि महर्षि कौण्डिन्य के आश्रम पहुंचा। उसने मुनि से अपने पापों से मुक्ति का उपाय पूछा। तब कौण्डिन्य ऋषि ने उसे वैशाख शुक्ल पक्ष की मोहिनी एकादशी का व्रत करने का उपदेश दिया। उन्होंने बताया कि इस व्रत के प्रभाव से अनेक जन्मों के पाप भी नष्ट हो जाते हैं।

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व्रत का फल और मोक्ष प्राप्ति

महर्षि के निर्देश पर धृष्टबुद्धि ने विधि-विधान से मोहिनी एकादशी का व्रत किया। व्रत के प्रभाव से वह पूर्णतः निष्पाप हो गया और अंततः दिव्य स्वरूप धारण कर भगवान विष्णु के धाम को प्राप्त हुआ।

धार्मिक मान्यता और महत्व

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार मोहिनी एकादशी व्रत कथा का पाठ और श्रवण करने से सहस्त्र गोदान के समान पुण्य प्राप्त होता है। यह व्रत न केवल पापों से मुक्ति देता है बल्कि जीवन में सुख-शांति और मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करता है।

Location :  New Delhi

Published :  27 April 2026, 10:34 AM IST

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