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सुप्रीम कोर्ट
New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम और ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए कहा है कि सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाली गृहिणियों (Home Makers) के काम का मूल्य कम से कम ₹30,000 प्रति माह माना जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुआवजे (Compensation) की गणना इसी आधार पर की जानी चाहिए।
न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि गृहिणियां केवल घर का काम करने वाली नहीं, बल्कि “राष्ट्र निर्माता (Nation Builders)” हैं। उनके द्वारा किए जाने वाले घरेलू कार्यों की सामाजिक और आर्थिक अहमियत अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे कमतर नहीं आंका जा सकता।
यह फैसला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अब तक गृहिणियों की काल्पनिक आय को कुशल मजदूरों (Skilled Workers) की मजदूरी के बराबर माना जाता था, लेकिन यह तरीका उचित नहीं है।
कोर्ट ने पुराने न्यायिक सिद्धांत को खारिज करते हुए कहा कि घरेलू काम की तुलना केवल मजदूरी से नहीं की जा सकती। घरेलू देखभाल और परिवार के संचालन में गृहिणियों की भूमिका आर्थिक रूप से अत्यंत मूल्यवान है।
फैसले में कहा गया कि मुआवजे की गणना में अब घरेलू कार्य के नुकसान को ₹30,000 मासिक आय के आधार पर जोड़ा जाएगा। यह राशि पहले से लागू “Pranay Sethi Case” में तय अन्य लाभों के अतिरिक्त होगी।
यह मामला पंजाब की रेशमा नामक महिला से जुड़ा है, जिनकी मौत नवंबर 2001 में सड़क दुर्घटना में हो गई थी। उनके पति और तीन बच्चों ने मुआवजे के लिए ट्रिब्यूनल का रुख किया था। मामला वर्षों तक न्यायिक प्रक्रिया में चलता रहा और अंततः 23 साल बाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में न्याय में हुई देरी पर भी गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय बाद मिलने वाला न्याय कई बार व्यावहारिक राहत को कम कर देता है।
Location : New Delhi
Published : 11 June 2026, 4:32 PM IST