सुप्रीम कोर्ट का Home Makers की आय पर बड़ा फैसला; गृहिणियों की आय मानी जाएगी ₹30,000 प्रतिमाह

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम और ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए कहा है कि सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाली गृहिणियों (Home Makers) के काम का मूल्य कम से कम ₹30,000 प्रति माह माना जाना चाहिए।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 11 June 2026, 4:32 PM IST
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New Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम और ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए कहा है कि सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाली गृहिणियों (Home Makers) के काम का मूल्य कम से कम ₹30,000 प्रति माह माना जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुआवजे (Compensation) की गणना इसी आधार पर की जानी चाहिए।

Housewives को बताया “Nation Builders”

न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि गृहिणियां केवल घर का काम करने वाली नहीं, बल्कि “राष्ट्र निर्माता (Nation Builders)” हैं। उनके द्वारा किए जाने वाले घरेलू कार्यों की सामाजिक और आर्थिक अहमियत अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे कमतर नहीं आंका जा सकता।

Supreme Court Bench का महत्वपूर्ण निर्णय

यह फैसला जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने कहा कि अब तक गृहिणियों की काल्पनिक आय को कुशल मजदूरों (Skilled Workers) की मजदूरी के बराबर माना जाता था, लेकिन यह तरीका उचित नहीं है।

Old Compensation Formula को खारिज किया

कोर्ट ने पुराने न्यायिक सिद्धांत को खारिज करते हुए कहा कि घरेलू काम की तुलना केवल मजदूरी से नहीं की जा सकती। घरेलू देखभाल और परिवार के संचालन में गृहिणियों की भूमिका आर्थिक रूप से अत्यंत मूल्यवान है।

₹30,000 की Notional Income तय

फैसले में कहा गया कि मुआवजे की गणना में अब घरेलू कार्य के नुकसान को ₹30,000 मासिक आय के आधार पर जोड़ा जाएगा। यह राशि पहले से लागू “Pranay Sethi Case” में तय अन्य लाभों के अतिरिक्त होगी।

Reshma Case से जुड़ा है मामला

यह मामला पंजाब की रेशमा नामक महिला से जुड़ा है, जिनकी मौत नवंबर 2001 में सड़क दुर्घटना में हो गई थी। उनके पति और तीन बच्चों ने मुआवजे के लिए ट्रिब्यूनल का रुख किया था। मामला वर्षों तक न्यायिक प्रक्रिया में चलता रहा और अंततः 23 साल बाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।

Delay in Justice पर कोर्ट की चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में न्याय में हुई देरी पर भी गंभीर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि इतने लंबे समय बाद मिलने वाला न्याय कई बार व्यावहारिक राहत को कम कर देता है।

Location :  New Delhi

Published :  11 June 2026, 4:32 PM IST

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