Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि के अवसर पर महाकाल में नॉनस्टॉप दर्शन, भक्तों के लिए की गई ये खास व्यवस्था

Mahashivratri 2026 पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में 44 घंटे नॉनस्टॉप दर्शन। जानिए शिव नवरात्रि का महत्व, दोपहर की दुर्लभ भस्म आरती और महादेव के विवाह उत्सव की खास बातें।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 15 February 2026, 8:55 AM IST
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Ujjain: विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि का पर्व हर वर्ष विशेष भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर पूरी उज्जैन नगरी शिवमय हो जाती है। इस वर्ष 6 फरवरी से शिव नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है, जो 16 फरवरी 2026 तक जारी रहेगी। इस दौरान भगवान महाकाल के विवाह उत्सव का आयोजन भी किया जा रहा है।

शिव नवरात्रि का धार्मिक महत्व

12 ज्योतिर्लिंगों में से एक महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में महाशिवरात्रि से नौ दिन पूर्व शिव नवरात्रि मनाने की परंपरा है। मान्यता है कि जैसे देवी शक्ति की उपासना के लिए नवरात्रि मनाई जाती है, उसी प्रकार यहां भगवान शिव की आराधना के लिए शिव नवरात्रि का आयोजन होता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप और साधना की थी। इसी स्मरण में शिव नवरात्रि का पर्व विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

महाशिवरात्रि पर 44 घंटे लगातार खुले रहेंगे पट

रविवार, 15 फरवरी 2026 को महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। मंदिर प्रशासन के अनुसार इस दिन महाकालेश्वर मंदिर के पट लगातार 44 घंटे तक दर्शन के लिए खुले रहेंगे। 15 फरवरी की सुबह 6 बजे से दर्शन शुरू होंगे और 16 फरवरी की सुबह तक बिना किसी विराम के जारी रहेंगे। इस दौरान देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु भगवान महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की हैं।

दोपहर की दुर्लभ भस्म आरती

16 फरवरी को दोपहर 12 बजे विशेष दोपहर की भस्म आरती आयोजित की जाएगी जो वर्ष में केवल एक बार होती है। इस अनूठी परंपरा में भगवान महाकाल को फलों, फूलों और सप्तधान्य से बने भव्य सेहरे से सजाया जाता है। महाकाल की भस्म आरती विश्वभर में प्रसिद्ध है और इसे देखने के लिए श्रद्धालु दूर-दूर से उज्जैन पहुंचते हैं।

चारों प्रहर होगी महादेव की पूजा

महाशिवरात्रि के दिन चारों प्रहर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन व्रत, रुद्राभिषेक और शिव नाम का जाप करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।

Location : 
  • Ujjain

Published : 
  • 15 February 2026, 8:55 AM IST

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