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अधिकमास पूर्णिमा 2026 (Img- Internet)
New Delhi: सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है, लेकिन जब यह पूर्णिमा अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ती है, तो इसका आध्यात्मिक फल कई गुना बढ़ जाता है। इस साल 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को लेकर दो दिन का चक्कर पड़ रहा है। पंचांग के गणित के कारण पूर्णिमा तिथि दो दिनों में विभाजित हो गई है।
शास्त्रों के नियमों के अनुसार, जब ऐसी स्थिति बनती है, तब पहले दिन व्रत और रात की पूजा की जाती है, जबकि दूसरे दिन उदयातिथि में पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य का कार्य किया जाता है। पूर्णिमा के इस पावन व्रत में मुख्य रूप से धन की देवी माता लक्ष्मी, चंद्र देव और भगवान सत्यनारायण की पूजा-अर्चना की जाती है, जिससे घर में सुख, अटूट शांति और समृद्धि का वास होता है।
वैदिक पंचांग की गणना के अनुसार, ज्येष्ठ अधिकमास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 30 मई, शनिवार को दिन में 11 बजकर 57 मिनट से हो रही है। वहीं, इस पावन तिथि का समापन अगले दिन यानी 31 मई, रविवार को दोपहर 2 बजकर 14 मिनट पर होगा।
चूंकि 30 मई को पूर्णिमा तिथि प्रदोष काल (शाम के समय) और चंद्रोदय के समय मौजूद रहेगी, इसलिए पूर्णिमा का उपवास और रात की लक्ष्मी पूजा 30 मई शनिवार को ही की जाएगी। वहीं दूसरी ओर, 31 मई को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान रहेगी, जिसके कारण उदयातिथि के नियम से स्नान और दान का महापर्व 31 मई रविवार को मनाया जाएगा।
इस साल अधिकमास पूर्णिमा व्रत के दिन बेहद कल्याणकारी 'रवि योग' का महासंयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रवि योग में की गई पूजा-अर्चना सीधे शुभ फल प्रदान करती है। 30 मई को रवि योग सुबह 05:24 एएम से शुरू होकर दोपहर 01:20 पीएम तक रहेगा। भगवान सत्यनारायण की कथा और पूजा के लिए सबसे उत्तम समय पूर्णिमा तिथि शुरू होने के बाद यानी दोपहर 11:57 एएम से है।
इसके बाद, शाम को सूर्यास्त के बाद माता लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है। इस दिन माता लक्ष्मी की आराधना के लिए 'लाभ-उन्नति मुहूर्त' शाम 07:13 पीएम से रात 08:30 पीएम तक रहेगा, जो आर्थिक उन्नति के लिए बेहद चमत्कारी माना जा रहा है।
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अधिकमास पूर्णिमा के दूसरे दिन यानी 31 मई को स्नान और दान का कार्य शिव एवं सिद्ध योग के बेहद पवित्र संयोग में संपन्न होगा। इस दिन दान-पुण्य के लिए ब्रह्म मुहूर्त का समय सुबह 04:03 एएम से लेकर 04:43 एएम तक रहेगा। हालांकि, श्रद्धालु सूर्योदय के बाद भी अपनी श्रद्धानुसार पवित्र नदियों में स्नान करके दान कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, जो लोग 30 मई को व्रत रख रहे हैं, उनके लिए चंद्रोदय का समय शाम को 7 बजकर 36 मिनट पर रहेगा। इस दिन विशेष बात यह है कि चंद्रास्त नहीं है। चंद्रोदय के बाद चांदी के पात्र में दूध और जल मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य देने से कुंडली का भारी से भारी चंद्र दोष दूर होता है और मानसिक शांति मिलती है।
Location : New Delhi
Published : 22 May 2026, 3:47 PM IST
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