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पंजाब में कैंसर से मौतों का आंकड़ा बढ़ा (IMG: AI Generated)
Punjab: पंजाब में कैंसर अब सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ता स्वास्थ्य संकट बनता दिखाई दे रहा है। सरकारी आंकड़ों ने इस खतरे की गंभीर तस्वीर सामने रखी है। राज्य में कैंसर के मामलों के साथ-साथ इससे होने वाली मौतों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में पंजाब में कैंसर के 43,196 नए मामले दर्ज किए गए, जबकि 24,886 लोगों की मौत इस बीमारी के कारण हुई। यानी औसतन हर दिन करीब 68 लोगों की जान कैंसर से गई। यही वजह है कि पंजाब सरकार ने कैंसर को अधिसूचित रोग घोषित कर दिया है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब में कैंसर के मामलों में पिछले पांच वर्षों के दौरान लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में राज्य में कैंसर के 39,521 मामले सामने आए थे। अगले साल यानी 2022 में यह आंकड़ा बढ़कर 40,435 हो गया। वर्ष 2023 में कैंसर के 41,337 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2024 में यह संख्या बढ़कर 42,288 पहुंच गई। वर्ष 2025 में भी यह सिलसिला नहीं रुका और कैंसर के 43,196 नए मामले सामने आए। आंकड़ों से साफ है कि हर साल कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
कैंसर के बढ़ते मामलों के साथ इस बीमारी से होने वाली मौतों ने भी चिंता बढ़ा दी है। वर्ष 2021 में पंजाब में कैंसर से 22,786 लोगों की मौत हुई थी। 2022 में यह संख्या बढ़कर 23,301 हो गई। इसके बाद वर्ष 2023 में कैंसर से 23,818 लोगों की जान गई, जबकि 2024 में मौतों का आंकड़ा 24,369 तक पहुंच गया। वर्ष 2025 में कैंसर से 24,886 मौतें दर्ज की गईं। यानी पांच साल के दौरान कैंसर से होने वाली मौतों में करीब 9.22 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
पंजाब का मालवा क्षेत्र कैंसर के बढ़ते मामलों को लेकर लंबे समय से चर्चा में रहा है। खासकर यहां के कई इलाकों में भूजल की गुणवत्ता और उसमें मौजूद हानिकारक तत्वों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। दूषित भूजल में यूरेनियम की अधिक मात्रा को लेकर भी चिंता जताई गई है। लंबे समय तक ऐसे तत्वों के संपर्क में रहने से शरीर के अलग-अलग अंगों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। मालवा क्षेत्र में भूजल प्रदूषण को लेकर संसदीय समिति भी चिंता जाहिर कर चुकी है।
कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए पंजाब सरकार ने इसे अधिसूचित रोग घोषित किया है। इसका मतलब है कि अब सरकारी और निजी अस्पतालों को कैंसर से जुड़े मामलों और उससे होने वाली मौतों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग को देना अनिवार्य होगा। इससे सरकार के पास राज्य में कैंसर के मामलों का ज्यादा व्यवस्थित और विस्तृत डेटा उपलब्ध हो सकेगा। इसी आधार पर बीमारी के प्रभावी इलाज, शुरुआती जांच और रोकथाम के लिए नीतियां तैयार करने में मदद मिल सकती है।
कैंसर का बढ़ता खतरा सिर्फ पंजाब तक सीमित नहीं है। पड़ोसी राज्य हरियाणा में भी पिछले कुछ वर्षों के दौरान कैंसर के मामलों और मौतों में बढ़ोतरी हुई है। आंकड़ों के अनुसार हरियाणा में 2021 में कैंसर के 30,015 मामले दर्ज हुए थे। 2025 में यह संख्या बढ़कर 33,395 हो गई। इसी तरह कैंसर से होने वाली मौतें भी 2021 में 16,543 से बढ़कर 2025 में 18,387 पहुंच गईं।
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पंजाब में कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे कई संभावित कारणों पर चर्चा होती रही है। इनमें दूषित भूजल, फसलों में रसायनों और कीटनाशकों का इस्तेमाल, खाद्य पदार्थों में मिलावट और बदलती जीवनशैली प्रमुख हैं। मालवा के कई हिस्सों में भूजल में यूरेनियम समेत अन्य तत्वों की मौजूदगी को लेकर समय-समय पर चिंता सामने आती रही है। हालांकि कैंसर के मामलों को किसी एक कारण से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा। इसके लिए विस्तृत epidemiological और चिकित्सकीय अध्ययन जरूरी हैं।
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने लोगों से कैंसर के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज नहीं करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार की मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना के जरिए पात्र मरीजों को कैंसर का उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने लोगों को खास तौर पर बिना वजह वजन कम होने, असामान्य रक्तस्त्राव, लंबे समय तक खांसी रहने और मल-मूत्र की सामान्य प्रक्रिया में बदलाव जैसे संकेतों पर ध्यान देने की सलाह दी है।
Location : Punjab
Published : 23 August 2026, 3:21 PM IST
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