मोहाली में टीडीआई सिटी पर ईडी का अचानक छापा, 4600 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले में बड़ा एक्शन

मोहाली के सेक्टर-119 में टीडीआई सिटी के दफ्तर पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने छापा मारा। जमीन मुआवजे में 6 करोड़ की अनियमितता और 4,619 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी दस्तावेजों और रिकॉर्ड खंगाल रही है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 29 September 2026, 10:39 AM IST
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Mohali: पंजाब के मोहाली स्थित सेक्टर-119 में उस वक्त अचानक अफरा-तफरी मच गई, जब केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की टीम ने टीडीआई सिटी (TDI City) के मुख्य कार्यालय पर रेड मार दी। तीन गाड़ियों में सवार होकर पहुंचे ईडी के अधिकारियों ने दफ्तर में दाखिल होते ही सुरक्षा घेरा बना लिया।

जांच को पूरी तरह गोपनीय रखने के लिए अधिकारियों ने सबसे पहले दफ्तर में मौजूद कर्मचारियों और अधिकारियों के मोबाइल फोन कब्जे में ले लिए। इसके बाद बाहरी लोगों की आवाजाही रोककर रिकॉर्ड्स खंगालने की कार्रवाई शुरू कर दी गई।

6 करोड़ रुपये के मुआवजा घोटाले में फंसा टीडीआई ग्रुप

सूत्रों के मुताबिक, ईडी की इस बड़ी कार्रवाई के तार पीआर-6 सड़क के निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के मुआवजे में हुई भारी अनियमितता से जुड़े हैं। आरोप है कि मास्टर प्लान के तहत आने वाली बेशकीमती जमीन के लिए जैसे ही सीएलयू (चेंज ऑफ लैंड यूज) की मंजूरी मिली, कंपनी ने अपने करीबियों और रिश्तेदारों के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री करवा दी।

ऐसा इसलिए किया गया ताकि सरकारी खजाने से ज्यादा से ज्यादा मुआवजा ऐंठा जा सके। हालांकि, बाद में मामला बिगड़ता देख कंपनी की ओर से जीएमएडीए (GMADA) के सामने इन रजिस्ट्रियों को रद्द कराने की अर्जी भी दी गई थी।

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14 हजार घर खरीदारों का पैसा हड़पने और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

ईडी की यह रेड केवल मुआवजे के खेल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा कनेक्शन टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के बड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ा हुआ है। जांच में सामने आया है कि कंपनी ने साल 2005 से 2014 के बीच हरियाणा के सोनीपत में 23 अलग-अलग रिहायशी और कमर्शियल प्रोजेक्ट शुरू किए थे। इन प्रोजेक्ट्स के नाम पर 14,000 से अधिक भोले-भाले बायर्स से 4,619 करोड़ रुपये से ज्यादा की मोटी रकम जमा कराई गई थी।

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18 साल बीते पर नहीं मिले आशियाने, शेल कंपनियों में भेजा पैसा

चौंकाने वाली बात यह है कि 16 से 18 साल का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी इनमें से कई प्रोजेक्ट्स आज तक अधूरे पड़े हैं और लोग अपने सपनों के मकान के लिए भटक रहे हैं। जांच एजेंसियों का आरोप है कि प्रमोटरों ने बायर्स से मिले पैसों को प्रोजेक्ट्स पूरा करने में लगाने के बजाय अपनी ही फर्जी सहायक (शेल) कंपनियों और जमीन मालिक संस्थाओं के खातों में एडवांस पेमेंट के रूप में ट्रांसफर कर दिया। फिलहाल ईडी की टीम बैंक खातों, शेल कंपनियों और फर्जी रजिस्ट्रियों से जुड़े सारे कागजात जब्त कर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।

Location :  Mohali

Published :  29 September 2026, 10:39 AM IST

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