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भरत भैया बसपा में शामिल (img: social media)
New Delhi/Mau: मधुबन विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा सियासी बदलाव देखने को मिला है। करीब 17 वर्षों तक भाजपा की राजनीति में सक्रिय रहे वरिष्ठ नेता भरत भैया ने पार्टी से इस्तीफा देकर बहुजन समाज पार्टी का दामन थाम लिया है। रविवार को पांती रोड स्थित गांधी मैदान में आयोजित बसपा सम्मेलन के दौरान उन्होंने अपने समर्थकों के साथ पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। भरत भैया के इस फैसले को केवल दल बदल के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे मधुबन की आगामी चुनावी राजनीति में नए समीकरणों की शुरुआत माना जा रहा है।
लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय हैं भरत भैया
भरत भैया पिछले कई वर्षों से मधुबन विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय राजनीति कर रहे हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2009 से उन्होंने इस क्षेत्र को अपनी कर्मभूमि मानकर जनता के बीच काम किया है। उन्होंने दावा किया कि वह लगातार जनसंपर्क, संगठनात्मक गतिविधियों और स्थानीय मुद्दों को लेकर सक्रिय रहे हैं। कोरोना महामारी से लेकर बाढ़, बिजली, सड़क और अन्य समस्याओं के दौरान जनता के बीच मौजूद रहने का भी उन्होंने दावा किया। अब भाजपा छोड़कर बसपा में जाने के बाद उनके सामने अपनी पुरानी राजनीतिक पकड़ को नए संगठन के साथ जोड़ने की चुनौती होगी।
टिकट नहीं मिलने से नाराजगी का लगाया आरोप
भाजपा छोड़ने के बाद भरत भैया ने पार्टी की कार्यप्रणाली और टिकट वितरण को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि लंबे समय तक संगठन के लिए काम करने के बावजूद उन्हें 2017 से लगातार विधानसभा चुनाव में मौका नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में अब जमीनी कार्यकर्ताओं की जगह बाहरी चेहरों, वंशवाद और धनबल को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। चुनाव से कुछ समय पहले प्रत्याशी तय करने की प्रक्रिया को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जताई। भरत भैया का कहना है कि इन्हीं परिस्थितियों के कारण उन्होंने भाजपा से अलग होकर बसपा के साथ नई राजनीतिक पारी शुरू करने का फैसला किया है।
बसपा को मिला स्थानीय सक्रिय चेहरा
भरत भैया का बसपा में शामिल होना पार्टी के लिए भी अहम माना जा रहा है। विधानसभा क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय एक राजनीतिक चेहरे को अपने साथ जोड़कर बसपा 2027 के चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश करती नजर आ रही है। वहीं, भाजपा के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भरत भैया लंबे समय तक संगठन से जुड़े रहे हैं। अब देखने वाली बात होगी कि उनके साथ जुड़े समर्थकों का कितना हिस्सा नए राजनीतिक दल के साथ जाता है।
मधुबन में जातीय समीकरण भी होंगे अहम
मधुबन विधानसभा क्षेत्र में चुनावी मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं होता, बल्कि सामाजिक और जातीय समीकरण भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। हर चुनाव में विभिन्न वर्गों के वोटों का ध्रुवीकरण परिणाम को प्रभावित करता है। ऐसे में भरत भैया की बसपा में एंट्री के बाद क्षेत्र के राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अगर वह अपने पुराने जनसंपर्क और समर्थक आधार को बसपा संगठन से जोड़ने में सफल होते हैं तो चुनावी मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।
भाजपा, बसपा और अन्य दलों के लिए बढ़ी चुनौती
2027 विधानसभा चुनाव में अभी समय बाकी है, लेकिन मधुबन में चुनावी तैयारियां शुरू हो गई हैं। भरत भैया का भाजपा छोड़कर बसपा में जाना स्थानीय राजनीति में बड़ा संदेश माना जा रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 17 साल की भाजपा राजनीति का अनुभव बसपा के लिए चुनावी फायदा साबित होगा? क्या भरत भैया अपने पुराने समर्थकों को नए राजनीतिक झंडे के नीचे एकजुट कर पाएंगे? और क्या यह बदलाव मधुबन के चुनावी गणित को बदल पाएगा? इन सवालों का जवाब आने वाले महीनों में सामने आएगा, लेकिन इतना तय है कि भरत भैया की बसपा में एंट्री ने 2027 की चुनावी जंग को अभी से चर्चा का विषय बना दिया है।
Location : New Delhi/Mau
Published : 9 August 2026, 5:15 PM IST
Topics : Bharat Bhaiya Madhuban Assembly Election Mayawati UP Assembly Election 2027 Yogi Adityanath