यूपी बीजेपी में संगठन विस्तार की रफ्तार धीमी, मोर्चों की नियुक्तियां लटकीं; 2027 चुनाव से पहले बढ़ी बेचैनी

उत्तर प्रदेश बीजेपी में नई प्रदेश टीम घोषित होने के एक महीने बाद भी मोर्चों, क्षेत्रीय समितियों और जिला प्रभारियों की नियुक्तियां लंबित हैं। सूत्रों के मुताबिक, सामाजिक और राजनीतिक संतुलन बनाने की कवायद के चलते प्रक्रिया में देरी हो रही है। 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच संगठनात्मक विस्तार में हो रही इस देरी को लेकर पार्टी के भीतर चर्चा तेज हो गई है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 4 August 2026, 1:02 PM IST

Lucknow: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भारतीय जनता पार्टी का संगठनात्मक विस्तार अपेक्षा से धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। नई प्रदेश टीम की घोषणा हुए एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक पार्टी के विभिन्न मोर्चों, क्षेत्रीय समितियों, जिला इकाइयों और जिला प्रभारियों की नियुक्तियां नहीं हो सकी हैं। इससे संगठन के भीतर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। पार्टी के कई नेता मानते हैं कि निचले स्तर पर नई टीम का गठन जितना जल्दी होगा, उतनी ही तेजी से बूथ स्तर तक संगठन की रणनीति लागू की जा सकेगी।

नई प्रदेश टीम के बाद अगला चरण अब भी बाकी

जून के अंत में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश की नई प्रदेश कार्यकारिणी का गठन किया था। उस समय संगठन ने जातीय संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और अनुभवी नेताओं को प्राथमिकता देते हुए नई टीम घोषित की थी। इसके बाद उम्मीद थी कि जल्द ही क्षेत्रीय समितियों, मोर्चों और जिला स्तर के पदाधिकारियों की भी घोषणा कर दी जाएगी, लेकिन अब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।

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2027 विधानसभा चुनाव से पहले अहम मानी जा रही नियुक्तियां

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए इन नियुक्तियों का महत्व काफी बढ़ जाता है। जिला प्रभारी, क्षेत्रीय समितियां और विभिन्न मोर्चों के पदाधिकारी ही सरकार और संगठन की योजनाओं को बूथ स्तर तक पहुंचाने का काम करते हैं। इन्हीं के जरिए सदस्यता अभियान, जनसंपर्क कार्यक्रम, प्रशिक्षण शिविर और चुनावी तैयारियों का बड़ा हिस्सा संचालित होता है। ऐसे में नियुक्तियों में हो रही देरी को संगठन की गति पर असर डालने वाला माना जा रहा है।

मोर्चों की भूमिका क्यों है अहम?

बीजेपी के युवा, महिला, किसान, पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), अल्पसंख्यक और किसान मोर्चा संगठन की जमीनी ताकत माने जाते हैं। ये मोर्चे अलग-अलग वर्गों तक पार्टी की पहुंच मजबूत करते हैं, सदस्यता अभियान चलाते हैं, कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखते हैं और चुनाव के दौरान बूथ प्रबंधन से लेकर प्रचार अभियान तक में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं।

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जिला प्रभारी संगठन की अहम कड़ी

जिला प्रभारी राज्य नेतृत्व और जिला इकाइयों के बीच समन्वय का काम करते हैं। वे संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी करते हैं, जिला स्तर पर कार्यक्रमों की समीक्षा करते हैं और समय-समय पर प्रदेश नेतृत्व को रिपोर्ट भेजते हैं।

Location :  Lucknow

Published :  4 August 2026, 1:01 PM IST