बिहारी बाबू का गूंजा डायलॉग, “ममता ही मेरी नेता, विपक्ष भाग्यशाली कि राहुल जैसा नेता मिला”

शत्रुघ्न सिन्हा ने एक इंटरव्यू में राहुल गांधी से लेकर ममता बनर्जी और भाजपा तक पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने राहुल को लेकर ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक चर्चा तेज कर दी।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 23 September 2026, 12:59 PM IST

New Delhi: तृणमूल कांग्रेस सांसद और अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा एक बार फिर अपने बेबाक बयानों को लेकर चर्चा में हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने राहुल गांधी, ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी और भाजपा को लेकर कई बातें कहीं। उन्होंने राहुल गांधी को लोकसभा में विपक्ष का नेता बताते हुए कहा कि विपक्ष भाग्यशाली है कि उसके पास उनके जैसा तेजतर्रार नेता है।

‘राहुल गांधी अकेले सौ पर भारी’

शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को देश के सामने रखा है। इसी संदर्भ में उन्होंने राहुल की तारीफ करते हुए कहा कि वह अकेले सौ पर भारी हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव प्रक्रिया और निर्वाचन व्यवस्था को लेकर विपक्ष की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, चुनाव प्रक्रिया से जुड़े आरोपों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों और संस्थाओं के अपने-अपने पक्ष रहे हैं। 

‘ममता ही मेरी नेता हैं’

टीएमसी में अपनी भूमिका पर बात करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने साफ कहा कि वह पार्टी में अभिषेक बनर्जी की वजह से नहीं, बल्कि ममता बनर्जी के कारण आए हैं। उन्होंने ममता को अपना नेता बताया। सिन्हा ने यह भी कहा कि मुश्किल समय में ममता बनर्जी ने उनका साथ दिया था, इसलिए अब वह उनके मुश्किल दौर में उनका साथ नहीं छोड़ेंगे।

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उन्होंने अपने रुख को बताते हुए कहा कि वह ‘टिकाऊ हैं, बिकाऊ नहीं’। साथ ही उन्होंने पार्टी छोड़कर जाने वाले नेताओं पर ज्यादा टिप्पणी करने से भी परहेज करने की बात कही।

अभिषेक बनर्जी पर भी बोले सिन्हा

शत्रुघ्न सिन्हा ने अभिषेक बनर्जी को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले अभिषेक को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर अच्छी राय थी, लेकिन चुनाव के बाद अचानक उनके बारे में नकारात्मक बातें होने लगीं। उन्होंने संसद में अभिषेक को अच्छा वक्ता बताते हुए कहा कि उनके जैसे वक्ता बहुत कम हैं। 

भाजपा छोड़ने की कहानी भी सुनाई

पूर्व भाजपा नेता ने अपने पुराने राजनीतिक सफर पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि जयप्रकाश नारायण के विचारों से प्रभावित होकर वह राजनीति में आए थे। उनके मुताबिक, नानाजी देशमुख ने उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी से मिलवाया था।

भाजपा छोड़ने के कारणों पर सिन्हा ने कहा कि पहले पार्टी में नेताओं के बीच संवाद की गुंजाइश थी, लेकिन बाद में उन्हें लगा कि उनकी उपेक्षा हो रही है। उन्होंने दावा किया कि 2014 के बाद उन्हें सरकार में जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद थी और स्वास्थ्य मंत्री बनाए जाने की चर्चा भी चली थी। लेकिन बाद में संवाद का आश्वासन मिलने के बावजूद उन्हें कुछ कार्यक्रमों में नहीं बुलाया गया। सिन्हा के मुताबिक, इसी घटनाक्रम के बाद उन्होंने भाजपा से अलग होने का फैसला किया।

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‘पहले लोकशाही थी, अब तानाशाही’

भाजपा के पुराने और मौजूदा स्वरूप की तुलना करते हुए सिन्हा ने कहा कि अटल-आडवाणी के दौर में पार्टी में लोकतांत्रिक संवाद था, जबकि अब उन्हें अलग माहौल दिखाई देता है। उन्होंने इसे ‘लोकशाही’ से ‘तानाशाही’ की ओर बदलाव बताया।

बंगाल की राजनीति पर भी सिन्हा ने चुनावी प्रक्रिया, केंद्रीय सुरक्षा बलों और अधिकारियों के तबादलों को लेकर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इन वजहों से तृणमूल को नुकसान हुआ। 

Location :  New Delhi

Published :  23 September 2026, 12:59 PM IST