
राहुल गांधी से दो बार क्यों मिले अखिलेश यादव? (Img: X)
New Delhi: संसद के मानसून सत्र के पहले दिन राजनीतिक गतिविधियां अपने चरम पर रहीं। एक ओर जंतर-मंतर पर CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आह्वान पर संसद मार्च को लेकर प्रदर्शन तेज हो गया, वहीं दूसरी ओर संसद परिसर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की दो बार मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया।
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी, अखिलेश यादव और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के बीच हुई बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इनमें नीट और अन्य परीक्षाओं में पेपर लीक, सोनम वांगचुक का आंदोलन, अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला और उत्तर प्रदेश की राजनीतिक स्थिति प्रमुख रही। बैठक में 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर विपक्षी रणनीति और संभावित गठबंधन पर भी विचार-विमर्श हुआ। पहली बैठक के कुछ समय बाद राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच एक और अलग बैठक हुई, जिसने अटकलों को और तेज कर दिया।
इधर, संसद मार्च के आह्वान पर हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर जुटे। जब प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर बढ़ने की कोशिश की तो दिल्ली पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया गया। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए नई दिल्ली जिले में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।
नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा ने स्पष्ट किया कि संसद मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी और बीएनएस की धारा 163 लागू होने के कारण जंतर-मंतर के निर्धारित क्षेत्र के बाहर प्रदर्शन की अनुमति नहीं है।
जंतर-मंतर पर हुई पुलिस कार्रवाई की गूंज संसद के भीतर भी सुनाई दी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पेपर लीक और प्रदर्शनकारी युवाओं पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है और उनकी मांगों को सुनने के बजाय बल प्रयोग कर रही है।
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राहुल गांधी और अखिलेश यादव की लगातार दो बैठकों ने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर नई अटकलों को जन्म दिया है। हालांकि दोनों दलों की ओर से बैठक का आधिकारिक एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे विपक्षी एकजुटता और भविष्य की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में मानसून सत्र का पहला दिन केवल संसदीय कार्यवाही तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने आने वाले राजनीतिक समीकरणों की भी झलक दिखा दी।
Location : New Delhi
Published : 20 July 2026, 12:59 PM IST