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आखिर उस वीडियो में ऐसा क्या था जिसने पंजाब के कैबिनेट मंत्री लालजीत भुल्लर की कुर्सी छीन ली? वेयरहाउस अधिकारी रंधावा की मौत और मंत्री के इस्तीफे की पूरी इनसाइड स्टोरी यहां पढ़ें।
मंत्री लालजीत भुल्लर (source; google)
Chandigarh: पंजाब की राजनीति में उस वक्त बड़ा मोड़ आ गया जब मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने कैबिनेट सहयोगी और परिवहन मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर से इस्तीफा ले लिया। यह कदम अमृतसर में तैनात पंजाब स्टेट वेयरहाउस कॉरपोरेशन (PSWC) के जिला मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा द्वारा आत्महत्या किए जाने और एक विवादित वीडियो सामने आने के बाद उठाया गया है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जांच की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए मंत्री का पद छोड़ना जरूरी था।
घटनाक्रम की शुरुआत अमृतसर से हुई, जहां जिला मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा ने सल्फास खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। सुसाइड से ठीक पहले रंधावा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित किया, जिसमें उन्होंने कैबिनेट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर पर गंभीर आरोप लगाए।
सूत्रों के अनुसार, विवाद एक गोदाम के लिए जगह आवंटित करने से जुड़ा था। विभाग की टीम ने बिजली की हाई वोल्टेज तारों के कारण प्रस्तावित जगह को असुरक्षित माना था और आवेदन रद्द कर दिया था। आरोप है कि शुक्रवार को अमृतसर दौरे के दौरान मंत्री ने रंधावा पर इस फैसले को बदलने के लिए कथित रूप से दबाव बनाया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया, जिससे क्षुब्ध होकर अधिकारी ने यह खौफनाक कदम उठाया।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस घटना को अत्यंत पीड़ादायक और दुखद बताया है। उन्होंने मृतक अधिकारी के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी दबाव की संस्कृति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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सीएम ने कहा, "हमने मंत्री का इस्तीफा इसलिए स्वीकार किया है ताकि मुख्य सचिव केएपी सिन्हा की अध्यक्षता में होने वाली जांच पूरी तरह पारदर्शी रहे। कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी ऊंचे पद पर क्यों न हो, अगर दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
इस्तीफा देने के बाद लालजीत सिंह भुल्लर ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी सफाई पेश की। उन्होंने खुद पर लगे आरोपों को पूरी तरह झूठा और निराधार करार दिया। भुल्लर ने कहा कि वह खुद चाहते हैं कि इस मामले की गहराई से जांच हो ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
उन्होंने मुख्यमंत्री से विनती की कि उनका इस्तीफा तुरंत स्वीकार किया जाए ताकि जांच प्रक्रिया में उनके पद का कोई प्रभाव न पड़े। उन्होंने पार्टी और सरकार का धन्यवाद किया कि उन्हें सच साबित करने का अवसर दिया गया है।
इस घटना ने विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका दे दिया है। कांग्रेस विधायक सुखपाल खैहरा और अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने इस मामले को लेकर सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है।
खैहरा ने मांग की है कि सिर्फ इस्तीफा काफी नहीं है, बल्कि मंत्री के खिलाफ धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। वहीं, मजीठिया ने डिजिटल साक्ष्यों और मोबाइल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की मांग की है ताकि सच्चाई छिपाई न जा सके।