Zero Waste Gardening: रसोई के कचरे को फेंकने की बजाय ऐसे बनाएं पौधों के लिए अमृत, खिल उठेंगे फूल
रसोई के ऑर्गेनिक कचरे जैसे सब्जियों के छिलके, चायपत्ती और अंडों के छिलकों का सही इस्तेमाल कर आप जीरो-वेस्ट गार्डनिंग कर सकते हैं। यह घरेलू नुस्खा पौधों को भरपूर पोषण देकर उन्हें कीड़ों से बचाता है और पर्यावरण के अनुकूल है।
क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई से रोजाना निकलने वाला कचरा आपके बगीचे के लिए वरदान साबित हो सकता है? जी हां, सब्जियों-फलों के छिलके, इस्तेमाल की हुई चायपत्ती जैसी चीजों का दोबारा इस्तेमाल कर आप बेहतरीन 'जीरो-वेस्ट गार्डनिंग' कर सकते हैं। (Img- Internet)
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यह तरीका पर्यावरण को प्रदूषित होने से तो बचाता ही है, साथ ही पौधों को बिना किसी केमिकल के प्राकृतिक पोषण भी देता है। आइए जानते हैं कि कैसे आप अपनी रसोई के कचरे को पौधों के लिए अमृत बना सकते हैं। (Img- Internet)
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रसोई से निकलने वाले फलों और सब्जियों के छिलके नाइट्रोजन और कार्बन के सबसे बेहतरीन स्रोत होते हैं। इनसे खाद (कंपोस्ट) बनाने के लिए एक बाल्टी या गमले के निचले हिस्से में थोड़ी सूखी पत्तियां या मिट्टी फैलाएं। इसके ऊपर रसोई का गीला कचरा डालें और इस प्रक्रिया को परत-दर-परत दोहराते रहें। (Img- Internet)
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कुछ ही हफ्तों में यह कचरा सड़कर काले रंग की शुद्ध ऑर्गेनिक खाद में बदल जाएगा, जो बाजार के महंगे केमिकल फर्टिलाइजर से कई गुना सुरक्षित और असरदार है। हर कचरे को खाद बनाने की जरूरत नहीं होती, कुछ चीजों को आप सीधे भी इस्तेमाल कर सकते हैं। इस्तेमाल की हुई चायपत्ती को अच्छी तरह धोकर और सुखाकर मिट्टी में मिलाने से मिट्टी एसिडिक बनती है, जिससे गुलाब जैसे पौधों में खूब फूल खिलते हैं। (Img- Internet)
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वहीं, अंडों के छिलकों को सुखाकर बनाया गया पाउडर कैल्शियम का पावरहाउस है, जो टमाटर और मिर्च के पौधों को सड़ने से बचाता है। इसके अलावा, पोटैशियम से भरपूर केले के छिलकों को छोटे टुकड़ों में काटकर मिट्टी में दबाने या इसके पानी से पौधों में फल-फूल तेजी से आते हैं। (Img- Internet)
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नींबू, संतरे और मौसमी के छिलकों को पानी और थोड़े से गुड़ के साथ एक प्लास्टिक की बोतल में 3 महीने रखकर बेहतरीन बायो-एंजाइम तैयार किया जा सकता है। इसका स्प्रे कीड़े-मकोड़ों को दूर रखता है। वहीं, चावल और दाल धोने के बाद बचे पानी को फेंकने की बजाय पौधों में डालने से उन्हें जरूरी स्टार्च और मिनरल्स मिलते हैं। (Img- Internet)