सुहाना मौसम, लेकिन शिशु पर भारी! मानसून में Mother To Be इन छोटी गलतियों से बचाएं गर्भ में पल रही नन्ही जान
बारिश का सुहाना मौसम गर्भवती महिलाओं के लिए दोहरी जिम्मेदारी लेकर आता है। जानें कि कैसे कुछ आसान और जरूरी एहतियात बरतकर आप इस मानसून में अपने गर्भ में पल रहे नन्हे शिशु को मौसमी बीमारियों, संक्रमण और अन्य गंभीर खतरों से पूरी तरह सुरक्षित रख सकती हैं।
मानसून की खुशनुमा रिमझिम अपने साथ हवा और पानी में खतरनाक बैक्टीरिया एवं वायरस का बड़ा संक्रमण भी लाती है, जिससे गर्भवती महिला की कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य और उसके सामान्य विकास पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है, इसलिए इस मौसम में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना और उबला हुआ शुद्ध पानी पीना बेहद जरूरी है। (Img- Envato)
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इस दौरान होने वाली मां को सड़क किनारे मिलने वाले खुले और तीखे स्ट्रीट फूड के साथ-साथ पैकेटबंद जंक फूड खाने से पूरी तरह बचना चाहिए, क्योंकि दूषित भोजन के सेवन से फूड पॉइजनिंग या टायफायड जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं, जो गर्भ में पल रहे मासूम बच्चे तक संक्रमण पहुंचाकर उसकी सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। (Img- Envato)
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गर्मी और अत्यधिक उमस के कारण गर्भवती महिलाओं के शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन की समस्या तेजी से बढ़ सकती है, जो सीधे तौर पर गर्भ में पल रहे बच्चे के आसपास मौजूद एमनियोटिक द्रव के स्तर को कम कर सकती है, इसलिए दिनभर में पर्याप्त मात्रा में नारियल पानी, नींबू पानी और ताजे फलों का सेवन करना सबसे उत्तम रहेगा। (Img- Envato)
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बारिश के दिनों में हर जगह होने वाली फिसलन और नमी के कारण होने वाली माताओं को चलते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की सख्त जरूरत होती है, क्योंकि इस नाजुक समय में जरा सा भी असंतुलन या छोटी सी गिरावट पेट में पल रहे बच्चे के लिए बेहद जानलेवा साबित हो सकती है, अतः हमेशा एंटी-स्लिप आरामदायक चप्पलें ही पहननी चाहिए। (Img- Envato)
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मानसून में मच्छरों का प्रकोप बहुत अधिक बढ़ जाता है जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी खतरनाक बीमारियों का खतरा रहता है, जो होने वाली मां के साथ-साथ गर्भस्थ शिशु के मानसिक और शारीरिक विकास को बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं, इसलिए डॉक्टर की सलाह से सुरक्षित मॉस्किटो रिपेलेंट का उपयोग करें और घर के आसपास पानी न जमा होने दें। (Img- Envato)