बिस्तर पर पड़ते ही दिमाग में चलने लगती हैं पुरानी बातें? जानें इस ओवरथिंकिंग से राहत पाने के आसान उपाय
रात में बिस्तर पर जाते ही पुरानी यादें, कल की चिंता और बेवजह के सवाल अक्सर नींद उड़ा देते हैं। ओवरथिंकिंग के इस चक्र को तोड़ने और दिमाग को शांत कर गहरी नींद पाने के लिए अपनाएं ये आसान और असरदार मनोवैज्ञानिक उपाय।
दिनभर की भागदौड़, काम के दबाव और लगातार व्यस्तता के बाद जब हम रात को बिस्तर पर लेटते हैं, तो हमारा शरीर भले ही सुस्ताने लगता है, लेकिन दिमाग एकदम सक्रिय हो जाता है। शांत माहौल मिलते ही पुरानी गलतियां, बीते दिनों की यादें और आने वाले कल की अनगिनत चिंताएं अचानक सामने आने लगती हैं। मनोवैज्ञानिक भाषा में इसे 'नाइटटाइम ओवरथिंकिंग' (Nighttime Overthinking) कहा जाता है। जब तक आप इन अनसुलझे विचारों के बवंडर से बाहर नहीं निकलते, तब तक मस्तिष्क शांत होकर नींद के मोड में नहीं जा पाता है। (Img- Pinterest)
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अगर रात को आपके दिमाग में विचारों की आंधी उठती है, तो बिस्तर पर जाने से ठीक 15-20 मिनट पहले एक डायरी में अपने सभी विचार लिखना शुरू करें। इसे 'ब्रेन डंपिंग' कहा जाता है। जो बातें या चिंताएं आपको परेशान कर रही हैं, उन्हें पन्नों पर उतार देने से मस्तिष्क को यह संकेत मिलता है कि अब इन बातों को बार-बार दोहराने की जरूरत नहीं है। ऐसा करने से मन का बोझ हल्का होता है, मानसिक तनाव तेजी से कम होता है और दिमाग को शांति का अहसास मिलने लगता है। (Img- Pinterest)
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बिस्तर पर जाने से कम से कम एक घंटे पहले स्मार्टफोन, टीवी और लैपटॉप की स्क्रीन से दूरी बना लें। इन उपकरणों से निकलने वाली नीली रोशनी हमारे शरीर में नींद पैदा करने वाले मेलाटोनिन हार्मोन के स्तर को गिरा देती है। इसके स्थान पर कमरे की लाइट धीमी करें और 4-7-8 गहरी सांस लेने वाली तकनीक का अभ्यास करें। चार सेकंड सांस अंदर लें, सात सेकंड तक रोकें और आठ सेकंड में बाहर छोड़ें। यह आसान अभ्यास दिमाग को वर्तमान में लाकर विचारों की गति को धीमा कर देता है। (Img- Pinterest)
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कल क्या करना है, किस काम को कैसे निपटाना है या आने वाले समय में क्या होगा इस तरह के सवाल ही अक्सर रात की नींद चुराते हैं। इससे बचने का सबसे आसान तरीका यह है कि आप अगले दिन के जरूरी कामों की लिस्ट शाम को या सोने से कुछ घंटे पहले ही तैयार कर लें। जब आपके पास कल का एक स्पष्ट नक्शा मौजूद होगा, तो आपका सबकॉन्शियस माइंड भविष्य की अनिश्चितता से नहीं डरेगा। इससे कल की चिंता काफी हद तक खत्म हो जाती है और नींद जल्दी आती है। (Img- Pinterest)
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बहुत से लोग दिनभर बिस्तर पर बैठकर काम करते हैं, खाना खाते हैं या मोबाइल चलाते हैं, जिससे दिमाग बिस्तर को काम की जगह मान लेता है। बिस्तर का इस्तेमाल केवल सोने और आराम करने के लिए ही करें। यदि बिस्तर पर लेटने के 20 मिनट बाद तक भी नींद न आए और विचार परेशान करें, तो तुरंत उठकर दूसरे कमरे में जाएं और धीमी रोशनी में कोई किताब पढ़ें। जब दोबारा तेज नींद महसूस हो, तभी वापस बिस्तर पर आएं। यह आदत आपके दिमाग को तुरंत सोने के लिए ट्रेन करेगी। (Img- Pinterest)
दिनभर की भागदौड़, काम के दबाव और लगातार व्यस्तता के बाद जब हम रात को बिस्तर पर लेटते हैं, तो हमारा शरीर भले ही सुस्ताने लगता है, लेकिन दिमाग एकदम सक्रिय हो जाता है। शांत माहौल मिलते ही पुरानी गलतियां, बीते दिनों की यादें और आने वाले कल की अनगिनत चिंताएं अचानक सामने आने लगती हैं। मनोवैज्ञानिक भाषा में इसे ‘नाइटटाइम ओवरथिंकिंग’ (Nighttime Overthinking) कहा जाता है। जब तक आप इन अनसुलझे विचारों के बवंडर से बाहर नहीं निकलते, तब तक मस्तिष्क शांत होकर नींद के मोड में नहीं जा पाता है। (Img- Pinterest)
अगर रात को आपके दिमाग में विचारों की आंधी उठती है, तो बिस्तर पर जाने से ठीक 15-20 मिनट पहले एक डायरी में अपने सभी विचार लिखना शुरू करें। इसे ‘ब्रेन डंपिंग’ कहा जाता है। जो बातें या चिंताएं आपको परेशान कर रही हैं, उन्हें पन्नों पर उतार देने से मस्तिष्क को यह संकेत मिलता है कि अब इन बातों को बार-बार दोहराने की जरूरत नहीं है। ऐसा करने से मन का बोझ हल्का होता है, मानसिक तनाव तेजी से कम होता है और दिमाग को शांति का अहसास मिलने लगता है। (Img- Pinterest)
बिस्तर पर जाने से कम से कम एक घंटे पहले स्मार्टफोन, टीवी और लैपटॉप की स्क्रीन से दूरी बना लें। इन उपकरणों से निकलने वाली नीली रोशनी हमारे शरीर में नींद पैदा करने वाले मेलाटोनिन हार्मोन के स्तर को गिरा देती है। इसके स्थान पर कमरे की लाइट धीमी करें और 4-7-8 गहरी सांस लेने वाली तकनीक का अभ्यास करें। चार सेकंड सांस अंदर लें, सात सेकंड तक रोकें और आठ सेकंड में बाहर छोड़ें। यह आसान अभ्यास दिमाग को वर्तमान में लाकर विचारों की गति को धीमा कर देता है। (Img- Pinterest)
कल क्या करना है, किस काम को कैसे निपटाना है या आने वाले समय में क्या होगा इस तरह के सवाल ही अक्सर रात की नींद चुराते हैं। इससे बचने का सबसे आसान तरीका यह है कि आप अगले दिन के जरूरी कामों की लिस्ट शाम को या सोने से कुछ घंटे पहले ही तैयार कर लें। जब आपके पास कल का एक स्पष्ट नक्शा मौजूद होगा, तो आपका सबकॉन्शियस माइंड भविष्य की अनिश्चितता से नहीं डरेगा। इससे कल की चिंता काफी हद तक खत्म हो जाती है और नींद जल्दी आती है। (Img- Pinterest)
बहुत से लोग दिनभर बिस्तर पर बैठकर काम करते हैं, खाना खाते हैं या मोबाइल चलाते हैं, जिससे दिमाग बिस्तर को काम की जगह मान लेता है। बिस्तर का इस्तेमाल केवल सोने और आराम करने के लिए ही करें। यदि बिस्तर पर लेटने के 20 मिनट बाद तक भी नींद न आए और विचार परेशान करें, तो तुरंत उठकर दूसरे कमरे में जाएं और धीमी रोशनी में कोई किताब पढ़ें। जब दोबारा तेज नींद महसूस हो, तभी वापस बिस्तर पर आएं। यह आदत आपके दिमाग को तुरंत सोने के लिए ट्रेन करेगी। (Img- Pinterest)