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लगातार गुस्सा करने से सोचने-समझने की क्षमता कमजोर होती है। द्वैष और क्रोध मन में नकारात्मक ऊर्जा भरते हैं। शांति, संयम और माफी को धर्म में ऊंचा स्थान दिया गया है। गुस्सा छोड़ने से मानसिक स्पष्टता बढ़ती है और फैसले अधिक संतुलित व सही होते हैं।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)
लगातार गुस्सा करने से सोचने-समझने की क्षमता कमजोर होती है। द्वैष और क्रोध मन में नकारात्मक ऊर्जा भरते हैं। शांति, संयम और माफी को धर्म में ऊंचा स्थान दिया गया है। गुस्सा छोड़ने से मानसिक स्पष्टता बढ़ती है और फैसले अधिक संतुलित व सही होते हैं।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)