हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद क्रिकेटर यूसुफ पठान जमीन केस में आया नया मोड़, कब्जे पर उठे सवाल

वडोदरा में टीएमसी सांसद यूसुफ पठान से जुड़ा 978 स्क्वायर मीटर जमीन विवाद फिर चर्चा में है। 20.5 करोड़ की वैल्यू तय होने के बाद VMC नीलामी की तैयारी में है। 2012 से चल रहा यह मामला अब कोर्ट, प्रशासन और राजनीति तीनों में बड़ा मुद्दा बन गया है।

Updated : 22 June 2026, 1:25 PM IST
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New Delhi: गुजरात के वडोदरा में 978 स्क्वायर मीटर के एक प्लॉट को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद यूसुफ पठान एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। यह मामला वर्ष 2012 से जुड़ा हुआ है, जब उन्होंने वडोदरा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (VMC) से 99 साल की लीज़ पर जमीन अलॉट करने का अनुरोध किया था।

उस समय VMC की स्टैंडिंग कमिटी और जनरल बोर्ड ने बिना पब्लिक ऑक्शन के उन्हें 57,270 रुपये प्रति स्क्वायर मीटर की दर से प्लॉट देने का प्रस्ताव मंजूर कर लिया था। हालांकि, यह प्रस्ताव बाद में राज्य सरकार के अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट के पास अटक गया।

सरकार ने 2014 में प्रस्ताव किया था खारिज

जून 2014 में विभाग ने इस अलॉटमेंट को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि बिना सार्वजनिक नीलामी प्रक्रिया के जमीन ट्रांसफर नहीं की जा सकती। इसके बाद यह डील आधिकारिक रूप से रुक गई, लेकिन आरोप है कि जमीन फेंसिंग के साथ यूसुफ पठान के कब्जे में बनी रही।

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कोर्ट में पहुंचा मामला और कब्जे पर सवाल

मामला लंबे समय तक ठंडा रहने के बाद 2024 में फिर सुर्खियों में आया, जब यूसुफ पठान पश्चिम बंगाल की राजनीति में सक्रिय हो चुके थे और लोकसभा सांसद चुने गए थे। इसी दौरान VMC ने उन पर नगर निगम की जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए नोटिस जारी किया।

पठान ने इस कार्रवाई को चुनौती दी और जमीन पर अपने अधिकार को मान्यता देने की मांग की।

हाई कोर्ट का फैसला और नई स्थिति

अगस्त 2025 में गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें मूल अलॉटमेंट प्रस्ताव को खारिज किया गया था। कोर्ट ने माना कि अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट ने अपने अधिकार क्षेत्र में सही निर्णय लिया था।

इस बीच कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि अलॉटमेंट रद्द होने और किसी भुगतान के बिना 2014 से जमीन पर कब्जा कैसे जारी रहा।

15 जून को मिला सीमित राहत का समय

इस साल 15 जून को मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने यूसुफ पठान को 1999 की राज्य नीति के तहत राहत पाने के लिए चार हफ्तों का समय दिया। यह नीति कुछ शर्तों के साथ अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को जमीन आवंटन की अनुमति देती है।

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि अगर सार्वजनिक जमीन पर बिना अनुमति कब्जा पाया जाता है, तो मुआवजा मौजूदा बाजार दर के आधार पर तय किया जा सकता है।

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20.5 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन से बढ़ा विवाद

VMC ने हाल ही में इस विवादित प्लॉट की नई वैल्यूएशन तय की है, जिसमें कीमत 2.10 लाख रुपये प्रति स्क्वायर मीटर आंकी गई है। इस हिसाब से प्लॉट की कुल कीमत लगभग 20.5 करोड़ रुपये बैठती है।

यह दर 14 साल पहले प्रस्तावित कीमत से लगभग तीन गुना अधिक बताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार यह वैल्यूएशन न केवल संभावित नीलामी के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि लंबे समय से कब्जे की स्थिति में संभावित वसूली के आकलन में भी भूमिका निभा सकती है।

VMC का रुख और नीलामी की तैयारी

VMC अधिकारियों का कहना है कि अब यह प्लॉट सार्वजनिक नीलामी के जरिए बेचा जा सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय लैंड और एस्टेट विभाग पर निर्भर करेगा।

साथ ही यह भी बताया गया है कि सात अन्य प्लॉट्स की वैल्यूएशन को भी मंजूरी दी गई है, जिनमें से कुछ सार्वजनिक और सरकारी परियोजनाओं के लिए आरक्षित हैं, जबकि दो रेजिडेंशियल उपयोग के लिए चिन्हित किए गए हैं।

राजनीतिक विवाद भी गहराया

इस मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। आरोप है कि यूसुफ पठान उन TMC सांसदों के समूह के साथ जुड़े हैं, जो पार्टी नेतृत्व से अलग राय रखते हैं।

इस बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने दावा किया कि संसद में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें चेतावनी दी गई थी कि राजनीतिक विरोध के कारण उनके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

इसके जवाब में TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए तीखी टिप्पणी की और पठान की स्थिति पर सवाल उठाए।

ओवैसी का बयान भी आया सामने

इस पूरे विवाद पर असदुद्दीन ओवैसी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कुछ सांसदों को लेकर राजनीतिक दबाव और आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति बनाई जा रही है और कई सवाल अब भी अनुत्तरित हैं।

Location :  New Delhi

Published :  22 June 2026, 1:10 PM IST

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