‘परजीवी’ कहकर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई फटकार? साइबर ठगी आरोपी की जमानत पर CJI का बड़ा संदेश

सुप्रीम कोर्ट ने साइबर फ्रॉड के आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए सख्त टिप्पणी की। CJI सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि साइबर अपराधी लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं और ऐसे मामलों में समाज की सुरक्षा जरूरी है। कोर्ट ने आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 17 June 2026, 7:52 PM IST

New Delhi: साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को एक साइबर फ्रॉड मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि ऐसे अपराधियों से सख्ती से निपटना जरूरी है, क्योंकि वे बड़ी संख्या में लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।

CJI की अध्यक्षता वाली बेंच ने सुनाया फैसला

 मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साइबर अपराधियों की कार्यप्रणाली पर चिंता जताई और कहा कि ये लोग अलग-अलग राज्यों में बैठे लोगों को अपना शिकार बनाते हैं।

कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज करते हुए कहा कि समाज की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ऐसे मामलों में कड़ा रुख जरूरी है।

“लोगों को शिकार बनाते हैं साइबर अपराधी”

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि साइबर अपराधी लोगों से बड़ी रकम ठगते हैं और उनका नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है। अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा कि अपराधी एक राज्य में बैठे व्यक्ति को दूसरे राज्य से ठगी का शिकार बना सकते हैं।

कोर्ट ने कहा कि साइबर अपराधों का असर सिर्फ आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कई बार पीड़ित मानसिक तनाव और गंभीर परेशानियों से भी गुजरते हैं।

ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों पर चिंता

देश में डिजिटल लेन-देन बढ़ने के साथ साइबर फ्रॉड के मामले भी तेजी से सामने आ रहे हैं। फर्जी निवेश योजना, ऑनलाइन लोन, फर्जी कॉल और डिजिटल माध्यमों से ठगी जैसे अपराधों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, साइबर अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए तकनीकी जांच के साथ-साथ राज्यों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।

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एनडीपीएस मामले में भी जमानत से इनकार

इसी सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में 60 वर्षीय महिला आरोपी को भी जमानत देने से इनकार किया। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने टिप्पणी की कि बार-बार अपराधों में शामिल होने के कारण आरोपी ने अपने आचरण से राहत पाने का आधार कमजोर कर दिया है।

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साइबर अपराधों को गंभीरता से लें

साइबर अपराधों को गंभीर मानने की एक बड़ी वजह यह है कि इनमें अपराधी पीड़ित की डिजिटल पहचान और भरोसे का इस्तेमाल करते हैं। कई बार ठगी के बाद रकम वापस मिलना मुश्किल होता है, क्योंकि अपराधी फर्जी खातों और कई स्तरों वाले नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे मामलों में अदालतों का सख्त रुख जांच एजेंसियों को भी मजबूत संदेश देता है कि डिजिटल अपराधों को सामान्य आर्थिक विवाद की तरह नहीं देखा जा सकता।

Location :  New Delhi

Published :  17 June 2026, 7:49 PM IST