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ऋषभ पंत (Img: X)
New Delhi: श्रीलंका दौरे के बाद भारतीय टीम के कई केंद्रीय अनुबंधित खिलाड़ी फिटनेस जांच के लिए बेंगलुरु पहुंचे। इनमें ऋषभ पंत, रवींद्र जडेजा, यशस्वी जायसवाल, श्रेयस अय्यर, संजू सैमसन, रिंकू सिंह और ऋतुराज गायकवाड़ जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।
बीसीसीआई की कोशिश है कि खिलाड़ी आगामी लंबे सीजन के लिए शारीरिक रूप से पूरी तरह तैयार रहें। अगले कई महीनों में भारतीय टीम को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार क्रिकेट खेलना है। ऐसे में खिलाड़ियों की फिटनेस को लेकर बोर्ड किसी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता।
बीसीसीआई ने खिलाड़ियों की फिटनेस जांच के मानकों को पहले की तुलना में और कड़ा किया है। टेस्ट में खिलाड़ियों की सहनशक्ति, गति और मैदान पर प्रदर्शन करने की क्षमता को परखा जा रहा है। इस दौरान खिलाड़ियों को ब्रोंको टेस्ट, 2 किलोमीटर दौड़, यो-यो टेस्ट और क्रिकेट से जुड़े विशेष ड्रिल्स से गुजरना पड़ा।
इन अभ्यासों का मकसद खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता का आकलन करना है। खास तौर पर विकेटों के बीच दौड़ने जैसे अभ्यास कराकर यह देखा गया कि खिलाड़ी मैच की परिस्थितियों में कितनी तेजी और निरंतरता के साथ प्रदर्शन कर सकते हैं।
फिटनेस कैंप में ब्रोंको टेस्ट को काफी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। यह शटल रन आधारित टेस्ट है, जिसमें खिलाड़ियों को लगातार दौड़ना होता है। इस टेस्ट में कुल 1200 मीटर की दूरी पांच सेट में पूरी करनी होती है। खिलाड़ियों को इसे लगभग 5 मिनट 15 सेकंड से 5 मिनट 20 सेकंड के आसपास पूरा करने का लक्ष्य दिया गया।
इसके अलावा खिलाड़ियों को 2 किलोमीटर दौड़ भी पूरी करनी थी। इसके लिए करीब 9 से 10 मिनट का निर्धारित समय रखा गया। इससे खिलाड़ियों की एरोबिक फिटनेस और सहनशक्ति को जांचने में मदद मिलती है।
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सिर्फ दौड़ और सहनशक्ति ही नहीं, खिलाड़ियों की क्रिकेट से जुड़ी फिटनेस पर भी ध्यान दिया गया। फिटनेस टेस्ट के दौरान विकेटों के बीच दौड़ने और अन्य क्रिकेट विशेष ड्रिल्स कराई गईं। इन अभ्यासों के जरिए खिलाड़ियों की तेजी, संतुलन और लगातार मैदान पर सक्रिय रहने की क्षमता को परखा गया। लंबे क्रिकेट सीजन में चोट से बचने और बेहतर प्रदर्शन के लिए इस तरह की फिटनेस अहम मानी जाती है।
तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा को इस बार फिटनेस टेस्ट से छूट दी गई है। श्रीलंका के खिलाफ लगातार दो टेस्ट मैचों में दोनों गेंदबाजों ने काफी गेंदबाजी की थी। उनके भारी वर्कलोड को देखते हुए फिलहाल उन्हें अतिरिक्त फिटनेस टेस्ट से बाहर रखा गया है। बीसीसीआई का यह कदम खिलाड़ियों पर अनावश्यक दबाव कम करने और उन्हें पर्याप्त रिकवरी का समय देने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जसप्रीत बुमराह, हार्दिक पांड्या और नीतीश कुमार रेड्डी फिलहाल अपनी चोटों से उबरने की प्रक्रिया में हैं। इसलिए उन्हें अभी पूरी तरह फिट घोषित नहीं किया गया है। ये खिलाड़ी रिहैबिलिटेशन पूरा करने के बाद फिटनेस टेस्ट देंगे। मेडिकल टीम और बीसीसीआई की निगरानी में उनकी फिटनेस पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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भारतीय टीम के लिए आने वाले महीने काफी व्यस्त रहने वाले हैं। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के साथ आईपीएल तक चलने वाले लंबे क्रिकेट कैलेंडर में खिलाड़ियों को लगातार मैदान पर उतरना होगा।
ऐसे में फिटनेस कैंप का उद्देश्य खिलाड़ियों को चोट से बचाना, उनके वर्कलोड को नियंत्रित करना और पूरे सीजन के लिए तैयार रखना है। बीसीसीआई की सख्ती से साफ है कि टीम प्रबंधन अब सिर्फ प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि खिलाड़ियों की फिटनेस और रिकवरी को भी प्राथमिकता दे रहा है।
Location : New Delhi
Published : 30 August 2026, 1:09 PM IST
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