जंग, महंगाई और जमाखोरी का डर… LPG पर सरकार ने फिर कसा शिकंजा, जानें पहले कब-कब लागू हुआ ECA

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और संभावित ऊर्जा संकट के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए Essential Commodities Act लागू कर दिया है। इसका मकसद जमाखोरी और काले बाजारी पर रोक लगाना और आम लोगों तक गैस की सप्लाई बनाए रखना है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 10 March 2026, 1:41 PM IST
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New Delhi: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग के बीच दुनिया के कई देशों के साथ ही भारत में भी ऊर्जा संकट की आशंकाएं हैं। इसी बीच केंद्र सरकार ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। घरेलू बाजार में रसोई गैस की उपलब्धता बनाए रखने और जमाखोरी को रोकने के लिए सरकार ने एक बार फिर आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) लागू कर दिया है।

घरेलू बाजार में गैस की उपलब्धता

सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस फैसले का सबसे बड़ा उद्देश्य घरेलू उपयोग के लिए गैस की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है। अगर किसी भी स्तर पर जमाखोरी या कालाबाजारी की कोशिश होती है, तो प्रशासन तुरंत कार्रवाई कर सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि एलपीजी भारत में करोड़ों घरों की रसोई से जुड़ा सबसे जरूरी ईंधन बन चुका है। ऐसे में सप्लाई में थोड़ी सी भी गड़बड़ी आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है। इसी वजह से सरकार ने पहले से ही नियंत्रण का तंत्र मजबूत करने का फैसला किया है।

पहली बार नहीं, कई बार लागू हो चुका है यह कानून

दिलचस्प बात यह है कि यह पहला मौका नहीं है जब सरकार ने Essential Commodities Act का सहारा लिया हो। इससे पहले भी कई बार अलग-अलग परिस्थितियों में इस कानून को लागू किया जा चुका है। जब भी देश में जरूरी वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं या जमाखोरी की आशंका पैदा होती है, तब सरकार इस कानून का इस्तेमाल करती है। इस कानून के तहत सरकार स्टॉक लिमिट तय कर सकती है, सप्लाई चेन को नियंत्रित कर सकती है और जरूरत पड़ने पर जमाखोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी कर सकती है।

अगस्त 2025 में भी लगाया गया था ECA

सबसे हालिया उदाहरण 26 अगस्त 2025 का है, जब केंद्र सरकार ने गेहूं की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए यह कानून लागू किया था। उस समय ट्रेडर्स और थोक विक्रेताओं के लिए गेहूं की स्टॉक लिमिट 3,000 मीट्रिक टन से घटाकर 2,000 मीट्रिक टन कर दी गई थी। रिटेलर्स के लिए भी स्टॉक लिमिट घटाकर 10 मीट्रिक टन से 8 मीट्रिक टन कर दी गई थी। प्रोसेसर्स के लिए भी उत्पादन क्षमता की सीमा तय कर दी गई थी ताकि बाजार में अनाज की कृत्रिम कमी न बनाई जा सके। सरकार का कहना था कि यह फैसला त्योहारों के मौसम से पहले गेहूं की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए लिया गया था।

कोरोना लॉकडाउन के समय भी हुआ था इस्तेमाल

इससे पहले अप्रैल 2020 में जब देश में COVID-19 महामारी के कारण लॉकडाउन लगाया गया था, तब भी सरकार ने इस कानून का इस्तेमाल किया था। उस समय जरूरी सामानों की सप्लाई को बनाए रखने और जमाखोरी रोकने के लिए राज्यों को भी इसी तरह के कदम उठाने के निर्देश दिए गए थे। लॉकडाउन के दौरान लेबर की कमी और उत्पादन में गिरावट के कारण कई चीजों की कीमतें बढ़ने लगी थीं। ऐसे में सरकार ने स्टॉक लिमिट तय की, कीमतों पर निगरानी रखी और उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।

2022 और 2023 में भी लिया गया सहारा

अगस्त 2022 में जब तुअर दाल की कीमतें बढ़ने लगी थीं, तब भी सरकार ने इस कानून का इस्तेमाल किया था। उस समय राज्यों को निर्देश दिए गए थे कि वे व्यापारियों के पास मौजूद दाल के स्टॉक की निगरानी करें। इसके बाद सितंबर 2023 में गेहूं की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी को रोकने के लिए भी स्टॉक लिमिट घटा दी गई थी। उस समय सरकार ने कहा था कि जमाखोर कृत्रिम कमी पैदा करके कीमतें बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। दिसंबर 2023 में भी गेहूं और आटे की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए स्टॉक लिमिट को और कम कर दिया गया था।

ऊर्जा संकट की आशंका से पहले ही सतर्क सरकार

अब जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही है, सरकार ने एलपीजी के मामले में पहले ही कदम उठा लिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक हालात का असर देश पर भी पड़ सकता है। ऐसे में सरकार का लक्ष्य यही है कि घरेलू बाजार में गैस की सप्लाई सामान्य बनी रहे और लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।

आम लोगों की रसोई पर नहीं आने दिया जाएगा संकट

सरकार का साफ कहना है कि एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। अगर कोई व्यापारी या बिचौलिया जमाखोरी करके बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि समय रहते उठाया गया यह कदम आने वाले दिनों में संभावित गैस संकट को टालने में मदद कर सकता है। फिलहाल सरकार की कोशिश यही है कि चाहे वैश्विक हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हों, देश के आम लोगों की रसोई में गैस की कमी महसूस न हो।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 10 March 2026, 1:41 PM IST

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