CJI सूर्यकांत पर पोस्ट करना पड़ा भारी! सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस से पूछा-अवमानना का केस क्यों न चले?

CJI सूर्यकांत पर केरलम कांग्रेस की सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और सचिव समेत सभी पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए। जानिए क्या था पूरा विवाद और सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान क्या कहा।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 6 November 2026, 4:00 PM IST

New Delhi: देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को लेकर सोशल मीडिया पर की गई एक टिप्पणी अब केरलम कांग्रेस के लिए कानूनी मुश्किल बनती नजर आ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए केरलम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और सचिव समेत सभी पदाधिकारियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने पूछा है कि आखिर उनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए?

CJI सूर्यकांत पर पोस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त

शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने की। पीठ वकील विनीत जिंदल की ओर से दाखिल एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की केरलम इकाई के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर प्रकाशित पोस्ट का मामला उठाया गया था। याचिकाकर्ता ने अदालत से इस पोस्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करने की मांग की थी।

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नेतृत्व की मंजूरी के बिना डाली गई थी पोस्ट

सुनवाई के दौरान केरलम प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि विवादित पोस्ट पार्टी के नेतृत्व की जानकारी, सहमति या मंजूरी के बिना अपलोड की गई थी। इसे पार्टी के एक कार्यकर्ता ने साझा किया था। मामला सामने आने और आलोचना बढ़ने के बाद पोस्ट को एक्स अकाउंट से हटा दिया गया। कांग्रेस की ओर से यह भी बताया गया कि संबंधित कार्यकर्ता को उसकी जिम्मेदारियों से हटा दिया गया है। इसके अलावा पार्टी की तरफ से इस पोस्ट के लिए बिना शर्त माफी भी मांगी गई है। कांग्रेस के वकील ने अदालत के सामने यह पक्ष रखा कि पोस्ट पार्टी नेतृत्व की आधिकारिक राय नहीं थी और इसे संगठन की मंजूरी प्राप्त नहीं थी।

'कोई राजनीतिक संगठन इससे ऊपर नहीं'

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में संविधान की सर्वोच्चता और न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर स्पष्ट संदेश दिया। पीठ ने कहा, ''संविधान सर्वोच्च है। कोई भी व्यक्ति या राजनीतिक संगठन इससे ऊपर नहीं है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता कोई राजनीतिक सुविधा का विषय नहीं है।'' अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में न्यायपालिका के फैसलों की आलोचना करने का अधिकार सभी को है। किसी फैसले से असहमति जताना या उस पर सवाल उठाना अपने आप में गलत नहीं है। लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का इस्तेमाल न्यायिक प्रक्रिया में दखल देने, न्यायपालिका को डराने या उसके कामकाज को प्रभावित करने के लिए नहीं किया जा सकता।

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अवमानना कानून के तहत मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने केरलम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सभी पदाधिकारियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। इसमें पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और सचिव भी शामिल हैं। अदालत ने उनसे जवाब मांगा है कि न्यायालय अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही क्यों न शुरू की जाए।

CJI को दी गई थी इस्तीफे की सलाह

दरअसल, विवाद की शुरुआत 12 अक्टूबर 2026 को हुई थी। इस दिन केरलम कांग्रेस के आधिकारिक एक्स अकाउंट से मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को संबोधित करते हुए एक पोस्ट साझा की गई थी। इसमें लिखा था, ''प्रिय सूर्य कांत, अगर कानून-व्यवस्था आपके दायरे में नहीं आती है, तो अभी इस्तीफा दे दें। हम आपकी जगह किसी ऐसे व्यक्ति को ले आएंगे जो इसे संभाल सके।'' इस पोस्ट के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया।

Location :  New Delhi

Published :  6 November 2026, 3:59 PM IST