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सस्टेनेबिलिटी स्ट्रैटेजिस्ट पूर्वा अवस्थी ने CPCB से देश भर के होटलों पर होने वाले असर के बारे मे बताया (IMG-DYNAMITE NEWS)
New Delhi: जल का उपयोग कैसे हो ओर जीवन मे इसका क्या महत्व है, ये जानना सबसे जरूरी है। घर हो, होटल हो या कोई अन्य जगह जल प्रदूषित हो जाए तो अलग तरह की समस्या खड़ी हो जाती है ऐसे में जल के मैनेजमेंट का अपना महत्व है। पानी और वेस्ट को सही तरीके से मैनेज न करने पर डाइनामाइट न्यूज़ की नई सीरीज में सस्टेनेबिलिटी स्ट्रैटेजिस्ट पूर्वा अवस्थी ने सेंट्रल पोलुशन कण्ट्रोल बोर्ड यानि cpcb के चलते होटलों पर पड़ने वाले असर के बारे में विस्तार से बताया है।
CPCB का पूरा नाम केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board) है। यह भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत काम करने वाला एक प्रमुख वैधानिक (Statutory) संगठन है। भारत के सेंट्रल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का गठन एक सांविधिक संगठन के रूप में जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के अन्तर्गत सितम्बर, 1974 में किया गया था। इसके पश्चात CPCB यानि सेंट्रल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को वायु अधिनियम, 1981 के अन्तर्गत शक्तियाँ व कार्य सौंपे गये।
सस्टेनेबिलिटी स्ट्रैटेजिस्ट पूर्वा अवस्थी ने बताया कि- जुलाई 2026 में सेंट्रल पोलुशन कण्ट्रोल बोर्ड ने यानि cpcb ने एक भी बड़ा और इम्पोर्टेन्ट फैसला लिया है, जिसका सीधा असर देश भर के होटलों पर पड़ता है। CPCB से पहले क्या होता था और इस फैसले से क्या बदला है ? आगे उन्होंने बताया कि- किसी होटल की केटेगरी लगभग सिर्फ कमरों की संख्या यानि उसके स्केल ऑफ़ ऑपरेशन को देख कर तय ही कर दी जाती थी और बड़े होटल्स सीधे सबसे सख्त यानि की रेड केटेगरी में चले जाते थे।
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अब नया सिस्टम इससे कहीं ज्यादा फेयर और वैज्ञानिक है। अब होटल की केटेगरी दो बातों से तय होती है, पहली उसका असली आकर क्या है और दूसरी सबसे जरूरी क्या वो क्लीन फ्यूल इस्तेमाल करता है। सभी होटल अपने पानी और वेस्ट को सही तरीके से मैनेज करते हैं या नहीं? यानि अब सिर्फ साइज नहीं बल्कि होटल असल में चलता है, ये भी मायने रखता है।
Location : New Delhi
Published : 6 November 2026, 3:57 PM IST
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