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CEC ज्ञानेश कुमार
New Delhi: देश की चुनावी राजनीति के बीच छिड़ा एक बड़ा संवैधानिक टकराव फिलहाल थम गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष की तरफ से लाया गया हटाने का प्रस्ताव शुरुआती चरण में ही अटक गया है। 193 सांसदों के समर्थन से तैयार इस नोटिस को लेकर संसद और सियासत दोनों में जबरदस्त हलचल थी, लेकिन अब राज्यसभा सभापति के फैसले के बाद साफ हो गया है कि फिलहाल ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कोई औपचारिक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ेगी। इस फैसले ने चुनाव आयोग, संसद और विपक्ष के बीच चल रही तनातनी को और भी ज्यादा राजनीतिक बना दिया है।
इस पूरे विवाद ने उस वक्त जोर पकड़ा था, जब विपक्षी खेमे के 193 सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए नोटिस तैयार किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें 130 लोकसभा और 63 राज्यसभा सांसदों के हस्ताक्षर शामिल थे। यह कदम सिर्फ राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि चुनावी निष्पक्षता और संस्थागत भरोसे पर सवाल उठाने वाला बड़ा संदेश माना गया। यही वजह रही कि मामला संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह चर्चा का केंद्र बन गया।
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12 मार्च को राज्यसभा में इस प्रस्ताव को लेकर औपचारिक हलचल शुरू हुई थी। इसके बाद सभापति ने इस मामले के सभी पहलुओं पर विचार किया और फिर प्रस्ताव स्वीकार करने से इनकार कर दिया। उपलब्ध रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह फैसला संबंधित प्रावधानों और प्रक्रिया के तहत लिया गया। इसका सीधा मतलब यह है कि फिलहाल मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हटाने की संसदीय प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी और उनका कार्यकाल जारी रहेगा।
विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार पर सात गंभीर आरोप लगाए थे। इनमें पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण रवैया, चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी, वोटरों के अधिकार प्रभावित होने और कुछ राजनीतिक दलों को कथित फायदा पहुंचाने जैसे आरोप शामिल बताए गए। खास तौर पर बिहार और पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR अभियान को लेकर विपक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। विपक्ष का दावा था कि इस प्रक्रिया से कई मतदाताओं का वोट देने का अधिकार प्रभावित हुआ और चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए।
Location : New Delhi
Published : 6 April 2026, 9:03 PM IST